Wednesday, February 29, 2012

माँ के आँचल से लिपट जाऊँ

माँ के आँचल से लिपट जाऊँ
क़ाश मैं भी बच्चा बन जाऊँ.

प्यार के गाँव में घर बसाऊँ 
क़ाश मैं भी सुख की छांव पाऊँ.

घर में गूंजे किसी बिटिया की हँसी 
क़ाश मैं भी किसी को अपना दोस्त बनाऊँ.

ज़िन्दगी यूँ भी जले रोशनी दे सबको 
क़ाश मैं भी दीपक बन जाऊँ.

मैं चुप रहूँ, माँ बोलती रहे 
रोमिल मैं चुप रहूँ, माँ बोलती रहे 
क़ाश उसकी बोली में मैं मिसरी की तरह घुल जाऊँ.

#रोमिल

Tuesday, February 28, 2012

प्यार की झोली समेट कर माँ चली गई ज़िन्दगी समेट कर

प्यार की झोली समेट कर
माँ चली गई ज़िन्दगी समेट कर

मैं दर पर खड़ा रहा अकेला
माँ चली गई राहें समेट कर

थकी धसी आँखें देखती रही मंज़र  
माँ चली गई सपने समेट कर

अब किससे कहूं की मेरे लिए दुआ कर 
रोमिल, माँ चली गई आशीर्वाद समेट कर.

#रोमिल

Monday, February 27, 2012

उंगलियाँ थाम के खुद चलाना सिखाया था माँ ने

उंगलियाँ थाम के खुद चलाना सिखाया था माँ ने
खुद रोकर हँसना सिखाया था माँ ने

कंधे पर बैठाकर झुलाया था माँ ने
धूप में नंगा कर नहलाया था माँ ने

नाराज़ी का नकली चेहरा लगाकर डांटा था माँ ने 
लोरी सुना, बड़े शौक से सुलाया था माँ ने

धूप में अपने आंचल से छुपाया था माँ ने
रोमिल खुद बच्चा बन नीम, आम के पेड़ के नीचे खिलाया था माँ ने.

#रोमिल

Sunday, February 26, 2012

मैं तो सिर्फ तुझे माँ कहूँ...

न तू मेरे नाना की बिटिया
न तू मेरी गुड्डा की दादी
न तू मेरे पिता की अर्धांगिनी  
तू तो है मेरी माँ
मैं तो सिर्फ तुझे माँ कहूँ...

न तू स्कूल की अध्यापिका 
न तू घर की सेठानी 
न तू मोहल्ले की न्यायकर्ता
तू तो है मेरी माँ
मैं तो सिर्फ तुझे माँ कहूँ...

न तू सरपंच, न मुखिया
न तू दुखियों की सुखिया
न तू अन्नदानी
तू तो है रोमिल की माँ
मैं तो सिर्फ तुझे माँ कहूँ...

#रोमिल

Saturday, February 25, 2012

कैसे कहूँ की माँ क्या है

कैसे कहूँ की माँ क्या है
शब्दों में पिरो सकूं, मुझमें ऐसी काबिलियत कहाँ है.

परमात्मा का रूप या सृष्टि की सबसे मूल्यवान रचना कहूँ
काशी, काबा या तीर्थ स्थान कहूँ 

त्याग, तपस्या या सेवा की देवी कहूँ
ममता, पालन-पोषण या परिवार का अनुशासन कहूँ

गुरु, आदर्श या मार्गदर्शक कहूँ 
बच्चों के लिए खिलौना, खुशियों का लिफाफा या लाखों आशीर्वादों, दुआओं का संसार कहूँ 

कैसे कहूँ रोमिल की माँ क्या है
शब्दों में पिरो सकूं, मुझमें ऐसी काबिलियत कहाँ है.

#रोमिल

दिल करता है माँ

दिल करता है माँ तुझे सताऊँ,
दिल करता है माँ तुझे चिड़ाऊँ,
थोडा सा रुलाऊँ,
फिर तुझे मनाऊँ!
~
याद है माँ आपका मुझे मारना,
चहरे पर गुस्सा लाना,
रूठ जाना,
फिर आँखों में आंसू लेते हुए मुस्कुराना!
~
दिल करता है हर पल मैं माँ तेरे साथ बिताऊँ,
ए मेरे रब,
हर पल को खट्टा-मीठा बनाऊं!

Friday, February 24, 2012

माँ मेरे साथ नहीं...

दुनिया कहती है,
मुझमे हौसला है,
विश्वास है,
ख़्वाब है,
कुछ कर दिखाने का जूनून है,
अगर कुछ है नहीं तो मुक़द्दर तेरे साथ नहीं...
और
मैं कहता हूँ,
माँ मेरे साथ नहीं...

दुनिया कहती है,
मंजिल तुझे पता है,
राहों में चाहे कितने भी कांटें बिछे हो,
उस पर चलने से तू डरता नहीं,
अगर कुछ है नहीं तो मुक़द्दर तेरे साथ नहीं...
और
मैं कहता हूँ,
माँ का हाथ मेरे हाथ में नहीं...

दुनिया कहती है,
शिव पर हमेशा विश्वास करता है,
हर एक के दर्द को तू अपना दर्द समझता है,
सबकी ज़िन्दगी में खुुशियां देना चाहता है,
तुम्हारी इन आँखों में हर एक के लिए सपने तमाम है,
अगर कुछ है नहीं तो मुक़द्दर तेरे साथ नहीं...
और
मैं कहता हूँ,
माँ जैसा गुरु मेरे साथ नहीं...

रोमिल का मुक़द्दार तो है माँ,
अगर माँ साथ नहीं तो मुक़द्दर मेरे साथ नहीं...

#रोमिल

माँ याद है...

माँ याद है आप गरमा गर्म जलेबा लाते थे
(वो बड़ी बड़ी वाली...)
वो प्रेमीएर वाली मीठी ब्रेड खिलाते थे
खोया और बूंदी से बने लड्डू बहुत ही लज़ीज़ होते थे
आलू पापड़ी चाट के आते ही हम भागे आते थे. 
याद है ना माँ...

हमको तो वो दुकाने भी नहीं पता जहाँ से माँ आप रोमिल के लिए यह सब लेकर आते थे...
सच्ची बाबा... सच्ची... लव यू...

#रोमिल

Thursday, February 23, 2012

पूछे जो कोई मुझसे भगवान कैसा होता है

पूछे जो कोई मुझसे भगवान कैसा होता है
अपनी माँ की तस्वीर दिखाकर कह दूं ऐसा होता है.

पूछे जो कोई मुझसे यह जन्नत कैसी होती है
अपनी माँ की गोद में सोकर दिखा दूं ऐसी होती है. 

पूछे जो कोई मुझसे नि:स्वार्थ प्यार क्या होता है
अपनी माँ की ममता की झलक दिखाकर कह दूं ऐसा होता है.

पूछे जो कोई मुझसे रोमिल माँ के बिना जीवन कैसा होता है
किसी अज्ञानी इंसान को दिखाकर कह दूं ऐसा होता है.

#रोमिल

Wednesday, February 22, 2012

शाम होते ही सब घर लौट आते है

शाम होते ही सब घर लौट आते है,
माँ न जाने आप कब आओगे...


कब मेरे घर आने का इंतज़ार करोगे 
कब मुझे थोडा डांटकर समझाओगे,
कब फिर वही प्यार से खाना खिलाओगे
कब दूध का ग्लास, पानी का लोटा, मिठाई, फल मेरे सिरहाने रखकर आप सो जायोगे.

माँ न जाने आप कब आओगे...

पर शायद माँ आप कभी नहीं आओगे,
न मुझे हँसाओगे,
न जाने फिर ऐसी ही कितनी रातें यादों में बीत जायेंगी,
माँ आप कभी नहीं आयोगे...

मैं आपसे रुबरु होने के लिए हमेशा प्यासा ही रहूँगा,
सपनो में हमेशा अपनी दुनिया बसाऊंगा.

माँ, शाम होते ही सब घर लौट आते है,
न जाने आप कब आओगे
अपने रोमिल के पास न जाने कब आओगे...

#रोमिल

Tuesday, February 21, 2012

कल रात कमरे में गया तो बैठे-बैठे कुर्सी पर सोचने लगा यह...

कल रात कमरे में गया तो बैठे-बैठे कुर्सी पर सोचने लगा यह...
माँ... रसोई घर से अब पहले जैसी खाने की महक नहीं आती
अब न सुखमनी साहिब, न जपुजी साहिब और न दुखभंजनी साहिब के शबद सुनाई देते है... 
ताम्बे के लोटे में अब पीने के लिए कोई पानी भरकर रखता नहीं
अब न्यूज़पेपर भी मेरे तकिये के नीचे मिलता नहीं 
फ्रीज में भी रखे हुए कहीं अंगूर दिखते नहीं
अब कमरे में एक घुटन सी रहती है...

माँ... कल रात कमरे में गया तो बैठे-बैठे कुर्सी पर सोचने लगा...

#रोमिल

Monday, February 20, 2012

माँ... तेरी डांट, मार बहुत खाते थे...

माँ तेरी डांट बड़ी याद आती है 
आज भी होंठों पर हंसी, आँखों में नमी आ जाती है...
~*~
मैदान में जाकर जब हम पतंग उड़ाते थे
उड़ाते-उड़ाते घर की चाभी कहीं खो आते थे
किसी मिस्त्री को पकड़कर फिर घर का ताला तुडवाते थे.
माँ... तेरी डांट, मार बहुत खाते थे...
~*~
अपनी शैतानियों से तुझे तंग बहुत करते थे
तुझे बहुत हम सताते थे
जब हदे पार हो जाती थी
फिर माँ तेरे हाथों से घर से निकाले जाते थे
ठिठुरती सर्दी में बोरी में रात बिताते थे.
माँ... तेरी डांट, मार बहुत खाते थे... 
~*~
दिनभर आवारा बनकर दोस्त के मोहल्ले में फिरा करते थे 
पढाई से जी जुराया करते थे 
एक्साम में जब हम तीसरी या चौथी श्रेणी में आते थे
तो आपको बिना बताये नाना जी से एक्साम कार्ड पर हस्ताक्षर करवाते थे
माँ... तेरी डांट बहुत खाते थे...
~*~
माँ तेरी डांट बड़ी याद आती है 
आज भी होंठों पर हंसी, आँखों में नमी आ जाती है...

#रोमिल

Sunday, February 19, 2012

माँ तुझसे डांट खाना...

मिट्टी के वोह छोटे-छोटे घर बनाना 
कपड़े जब गंदे हो जाये 
फिर माँ तुझसे डांट खाना...

बरसते हुए पानी में भीगते हुए आना
छपर-छपर करते पानी में कूद लगाना 
फिर माँ तुझसे डांट खाना... 

तितलियों के पीछे भागते हुए जाना
पकड़कर, लाकर माँ तुझे दिखाना 
फिर माँ तुझसे डांट खाना... 

पेन से घर की दीवारों पर स्केच बनाना
अपनी हथेली पर नाम लिखना 
 फिर माँ तुझसे डांट खाना... 

तेरे हाथों की कटोरी में पानी पीना
स्कूल शर्ट को पेंट के बाहर निकाल कर चलना 
फिर माँ तुझसे डांट खाना... 

अपने चहरे को तेरे दुपट्टे से ढक कर
तेरे आगे पीछे घुमाना 
फिर माँ तुझसे डांट खाना...
बड़ा याद आता है रोमिल को माँ तुझसे डांट खाना...
माँ तुझसे डांट खाना...

#रोमिल

Saturday, February 18, 2012

काश माँ ऐसा होता...

माँ काश ऐसा होता आप मुझसे बातें करती
और मैं आपकी गोद में 
लेटा होता.
काश माँ ऐसा होता...
***
माँ कब तक मैं दीवार पर तंगी आपकी तस्वीर से करता रहूँगा आपकी बातें
कब तक दिल को बहलाता रहूँगा
कब तक आंसू बहाता रहूँगा
माँ काश ऐसा होता आप मुझसे बातें करती
और मैं आपकी गोद में 
लेटा होता.
काश माँ ऐसा होता...

***
कभी आप पोछते मेरी आँखों के आंसू
कभी मैं पोछता आपके आंसू
कभी आप मुझे हँसाते  
कभी मैं आपको हँसाता
माँ काश ऐसा होता आप मुझसे बातें करती
और मैं आपकी गोद में 
लेटा होता.
काश माँ ऐसा होता...
***
होती न अँधेरी यह ज़िन्दगी
रोशनी का शमा सुहाना रहता
यूं न तकते हम चाँद को रातों में
यूं न आवारा फिरता होता
मैं आपकी गोद में सोता
माँ काश ऐसा होता आप मुझसे बातें करती
और मैं आपकी गोद में 
लेटा होता.
काश माँ ऐसा होता...

#रोमिल

Friday, February 17, 2012

एहसान करती हैं...

माँ तेरी खैरियत मुझे बताती हैं
यह हवा मुझ पर एहसान करती हैं...
~*~
तेरे चहरे का नूर दिखाती हैं
यह चांदनी मुझ पर एहसान करती हैं...
~*~
तेरा मन आज भी खुश है - प्रसन्न है, यह बताता हैं
यह फूलों की महक मुझ पर एहसान करती हैं...
~*~
माँ तूने आज फिर रोमिल को अपना आशीर्वाद दिया है 
यह सूरज की रोशनी मुझ पर एहसान करती हैं...

#रोमिल

Thursday, February 16, 2012

कभी भूला पाओगे

शिव की रहमत को कैसे इनकार कर पाओगे 
क्या माँ का क़र्ज़ कभी भूला पाओगे

यह सृष्टी रचियता शिव है 
माँ ने हाथ पकड़कर चलना सिखाया क्या भूला पाओगे

दो कोमल नयन दिए शिव ने सृष्टी देखने के लिए
माँ ने अच्छा बुरा का फर्क समझाया क्या भूला पाओगे

शुक्र करो शिव का जो बोलने के लिए जुबान दी
मधुर वाणी माँ ने बोलना सिखाया क्या भूला पाओगे

बुद्धि-मन-स्मरण शक्ति दी शिव ने
इल्म हासिल करना माँ ने सिखाया क्या भूला पाओगे

ज़िन्दगी दी शिव ने
जीना सिखाया माँ ने क्या भूला पाओगे.
रोमिल क्या भूला पाओगे.

#रोमिल

Wednesday, February 15, 2012

माँ की बात निराली होती है.

माँ की बात निराली होती है
प्यारी सी लोरी
राजा-रानी की कहानी सुना
दूध पिला देती है.
माँ की बात निराली होती है.

मीठी-मीठी बातें कर
ढेर सारे गुन बता
घी दाल कर
खिचड़ी खिला देती है.

माँ की बात निराली होती है.

आगे पीछे भाग - दौड़कर
खेल - खेल में
दाल-चावल खिला देती है.
माँ की बात निराली होती है.

कभी समझा कर
कभी डांटकर
विटामिन की उपयोगिता बता
हरी सब्जियां खिला देती है
रोमिल, माँ की बात निराली होती है.

#रोमिल

माँ तू जहाँ भी रहे, बस मुस्कुराती रहे

माँ तू जहाँ भी रहे
बस मुस्कुराती रहे
रोशनी बन कर
आसमान पर छाती रहे
माँ तू जहाँ भी रहे
बस मुस्कुराती रहे.
^*^
तू जहाँ भी रहे
बस मुस्कुराती रहे
चारों तरफ हो बस फ़रिश्ते तेरे
रब की जुबान में हो नाम तेरा
फिजाओं में फैली हो महक तेरी
माँ तू जहाँ भी रहे
बस मुस्कुराती रहे.
^*^
माँ तू जहाँ भी रहे
बस मुस्कुराती रहे.
हर खवाब तेरा पूरा हो
सूरज का तेरे घर सवेरा हो
रब का सर पर तेरे हाथ रहे
माँ तू जहाँ भी रहे
बस मुस्कुराती रहे.

Tuesday, February 14, 2012

खाली कमरे में नज़रे तुझे ढूँढती है

खाली कमरे में नज़रे तुझे ढूँढती है
कभी चीखती है
कभी पुकारती है
जब तू नज़र नहीं आती है 
फिर माँ, थककर रोकर सो जाती है.

आवारा फिरते फिरते जब मैं थक जाता हूँ
घर की मुंडेरी पर जैसे ही मैं आता हूँ
किवाड़ खटखटाता हूँ
माँ, तेरे न होने का एहसास जब मन में आता है
मैं वापस ही लौट जाता हूँ.

जब कंधों पर यादों की झोली रखकर
भीने-भीने मुस्कुराता हूँ
माँ दीवार पर टंगी तेरी तस्वीर को देखता हूँ
भोले बीते लम्हों में खो जाता हूँ.

आँखें मूँदकर जब मैं भरी धूप में किसी पेड़ की आड़ में लेट जाता हूँ
तेरे आँचल को तरसता हूँ
माँ तेरी ममतामय छवि को सोचता जाता हूँ
और उसमे खो जाता हूँ.
और रोमिल उसमे खो जाता हूँ

#रोमिल

Monday, February 13, 2012

माँ, आप आ जाओ

माँ, आप आ जाओ
आपसे हाल-ए-दिल कहना चाहता हूँ
कुछ बातें जो मैंने दिल में छुपा रखी है वो कहना चाहता हूँ
कौन जाने
कब मेरी यह आँखें बंद हो जाये
आप आ जाओ
आपसे ह़र एक बात कहना चाहता हूँ

आप आ जाओ माँ
मैं आपसे मिलना चाहता हूँ
छुपकर, अंजान होकर, सब कुछ देखती रहती हो आप
अब मैं यह आँख-मिचोली बंद करना चाहता हूँ
आप आ जाओ
मैं आपको देखना चाहता हूँ...

बहुत प्यार करता हूँ आपसे कभी कह न पाया
जब आप पर गुस्सा हो जाता था
तो चुपचाप बाथरूम में जाकर या तकिये से लिपट कर रो भी लेता था
कभी आपको, अपने आंसू दिखा न पाया
अपनी हर गलती के लिए माफ़ी मांगना चाहता हूँ
आप आ जाओ
माँ, आप बस आ जाओ...
रोमिल के पास जल्दी से आ जाओ...

#रोमिल

अम्मा

जब मुझे छोड़कर गई अम्मा
ममतामय ज़िन्दगी सुनी हो गई
तब समझ आई क्या होती है अम्मा.

खट्टी-मीठी चटनी जैसी
खट्टे-मीठे आचार जैसी
कभी प्यार से समझाए, कभी डांटे अम्मा.

आँगन में तुलसी जैसी
गागर में गंगा जल जैसी
घर में सबसे प्यारी, सबसे अच्छी अम्मा.

मंदिर में दीप जैसी
अँधेरे में प्रकाश जैसी
सबको ज्ञान देती अम्मा
रोमिल, सबको ज्ञान देती मेरी अम्मा.

#"रोमिल

Sunday, February 12, 2012

रब के घर में जब याद मेरी आये

माँ... रब के घर में जब याद मेरी आये,
तो रुकना मत,
मेरे पास वापस लौट आना.

फ़रिश्ते का हाथ पकड़कर,
महारानी के पलने में सोते हुए आना.

अगर चाँद, चांदनी न दे,
तो रास्ते में डरना मत,
अपनी बन्द आँखों में मेरी सूरत लिए बस चली आना.

जब रास्ते में बादल डराए,
जोर-जोर से आवाज़ सुनाये
तो उदास मत होना,
हवाओं के झोखे पर हाथ रखते हुए धीरे-धीरे,
मेरा नाम लेते हुए चली आना,

जब तुमको दूरी बहुत लगे,
मन साथ न दे,
रब के घर में ही ख़ुशी मिले,
तो मायूस मत होना,
वही रहना,
खूब-खुश रहना,
शांति से रहना,
और महारानी के पलंग में आराम करना.

मगर जब तुम्हें मेरी याद आये,
तो रूकना मत,
घबराना मत,
मुझे अपना समझाना,
और माँ अपने रोमिल के पास चली आना...

#रोमिल

Saturday, February 11, 2012

अब तो आ जाओ माँ मेरे पास

मेरी बातों पर यकीन करो माँ
मेरी सुनो तो ज़रा...
अब हम किसी से लड़ाई नहीं करेंगे
न ही किसी को कुछ अपशब्द बोलेंगे
कोई कुछ बोलेगा भी तो चुपचाप सुन लेंगे
जो आप कहोगी वोह ही हम करेंगे
आ जाओ
अब तो आ जाओ माँ मेरे पास
अब तो आ जाओ माँ मेरे पास...
***
सुबह समय से ही जागेंगे
खाना भी समय से ही खायेंगे
रात में भी समय से ही सो जाया करेंगे
जो आप कहोगी वोह ही हम करेंगे
आ जाओ
अब तो आ जाओ माँ मेरे पास
अब तो आ जाओ माँ मेरे पास...
***
शूज खुद ही साफ़ करेंगे
टाई नौट भी ठीक से बांधेंगे
ब्रेकफास्ट बनाना भी सीख लेंगे
जो आप कहोगी वो ही हम करेंगे
आ जाओ
अब तो आ जाओ माँ रोमिल के पास
अब तो आ जाओ माँ रोमिल के पास...

#रोमिल

Friday, February 10, 2012

माँ मेरे सर पर हाथ रख दो

माँ मेरे सर पर हाथ रख दो, 
मैं कामयाबी को पा लूँगा.

 डांट के ही सही मुझे सुला दो माँ 
मैं दो घड़ी नींद को पा लूँगा.

एक बार मेरा हाथ थामो माँ
मैं मंजिल को पा लूँगा.

देखो मैं ज़िन्दगी के रास्ते में कितना अकेला, तन्हा हूँ
एक बार ही सही मेरे हाथों में अपना हाथ दो माँ... 

#रोमिल

Thursday, February 9, 2012

ऊन के गोले में छोटे-छोटे सपने बुनती माँ

ऊन के गोले में छोटे-छोटे सपने बुनती माँ
तेरे आने की घड़ियों में कभी सोती, कभी जागती माँ.

खिलौनों को सजेती, कभी खुद खिलौना बन जाती माँ
कभी काजल का टीका लगाती, कभी नज़र उतारती माँ.

कीवाड़ पर तेरी राह देखती, तेरी चिंता में न सोये माँ
कभी जबरदस्ती तो कभी कहानी-लोरी गाकर सुलाए माँ.

कभी डांटे, कभी लाड-दुलार दिखाए माँ
रोमिल, बच्चे से चाहे जितनी भी दूर हो, फिर भी दिल में रहती माँ.

#रोमिल

Wednesday, February 8, 2012

मुझे तो रब, माँ में मिला.

न मक्का, न काशी में मिला
मुझे तो रब, माँ में मिला.

न दुनिया के किसी कोने में मिला
मुझे सुकून - चैन माँ की गोद में मिला.

हर जगह ढूंढी दो पल की ख़ुशी
मुझे ख़ुशी का पिटारा माँ में मिला.

हर किसी को परख के देखा दुनिया में रोमिल
मुझे मेरा अपना सिर्फ माँ में मिला.

#रोमिल

Monday, February 6, 2012

माँ केवल माँ नहीं प्रेम का सागर है.

कितना गहरा इसमें प्यार समाया
मेरे जीवन का संसार समाया
भक्ति, आदर्श, संसार का गागर है
माँ केवल माँ नहीं प्रेम का सागर है.

माँ ने ही जीवन दिया
माँ ने ही जीवन सवारा है
पल पल हर पल साथ दिया
हर कष्ट से माँ ने ही उभारा है

भूख, प्यास सब सह लेती है
बच्चों की अभिलाषा के लिए व्रत रख लेती है
जग बदला यह सारा है
माँ का प्यार वही अनोखा, निराला है.

ब्रह्मा की सबसे महान रचना है
सृष्टि में माँ जैसा न कोई दूजा है
अपने बच्चों की पीड़ा पल भर में हर लेती है
माँ, बच्चों की ख़ुशी के लिए सुख-चैन त्याग देती है.

कितना गहरा इसमें प्यार समाया
मेरे जीवन का संसार समाया
भक्ति, आदर्श, संसार का गागर है
रोमिल, माँ केवल माँ नहीं प्रेम का सागर है.

#रोमिल

Sunday, February 5, 2012

आँखों में छोटे - छोटे सपने सजा देती थी

आँखों में छोटे - छोटे सपने सजा देती थी
नींद नहीं आती थी तो माँ लोरी सुना देती थी.

कभी कहानियाँ सुनाती तो कभी चित्र बनाती थी
जब अंग्रेजी, गणित भाषा समझ ना आये तो माँ बड़े प्यार से समझाती थी.

जब बत्ती चली जाती थी तो माँ मोमबत्ती जला साथ बैठती थी
कभी टीवी पर साथ बैठा रंगोली, रामायण, महाभारत दिखाती थी.

जब छोटा था मैं रोमिल... मेरा हाथ कभी नहीं छोड़ती थी
अपनी गोद में बैठा मुझे झूला झुलाती थी.

जीवन की भाग दौड़ में माँ हमेशा साथ रहती थी
पल भर में हँसाती थी, सरे दुःख-दर्द भुला देती थी.

आँखों में छोटे - छोटे सपने सजा देती थी
नींद नहीं आती थी तो माँ लोरी सुना देती थी.

#रोमिल

Saturday, February 4, 2012

फरिश्तों का काम होता है.

दूसरों को ख़ुशी देना, 
फरिश्तों का काम होता है.

अपने दुःख की परवाह न करते हुए, 
दूसरों को सुख देना, 
फरिश्तों का काम होता है. 

अपने जीवन की परवाह किये बिना, 
दूसरों को जीवन देना, 
फरिश्तों का काम होता है. 

रब की बंदगी करना, 
उसके सजदे में सदा रहना, 
उस पर भरोसा रखना, 
फरिश्तों का काम होता है. 

हमेशा ईमानदार रहना,
सदा सच बोलना, 
सदा सबका भला सोचना, भला करना,
सबसे अच्छाई का व्यवहार करना,
फरिश्तों का काम होता है. 

रोमिल, मेरी माँ भी ऐसी थी...

#रोमिल

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है
भूली-बिसरी बचपन की यादें आँखों के सामने आ जाती है.

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

मन व्याकुल होकर उसे तलाशा करता है
घर के कोने में ना जाने कहाँ ख़ुशी छुप जाती है.

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

आँखें पथरा के रसोई घर की तरफ निहारा करती है
जब कानों में गूंजती हुई उसकी आवाज़ आ जाती है.

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

जो मेरे लिए अरदास करती थी आज मन उसके लिए अरदास करता है
जब रोमिल, माँ भगवान जी के घर चली जाती है...

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

#रोमिल

Zindagi Jab Mayush Hoti Hai Tabhi Mehsus Hoti Hai

"Zindagi Jab Mayush Hoti Hai Tabhi Mehsus Hoti Hai"

#Romil

ज़िन्दगी जब मायूस होती है तभी महसूस होती है...

#रोमिल

Friday, February 3, 2012

पाँव छुकर घर से निकालो तो हर शुभ कार्य हो जाता है

पाँव छुकर घर से निकालो तो हर शुभ कार्य हो जाता है
माँ का आशीर्वाद मिले तो जीवन सफल हो जाता है.

सुख-दुःख के मृत्युलोक में इंसान फँस के रह जाता है 
रोमिल, माँ का साथ मिले तो जीवन तर जाता है.

#रोमिल

मुमकिन है मेरी बात से किसी को पहुँची हो ठेस

मुमकिन है मेरी बात से किसी को पहुँची हो ठेस
मगर मैंने आज तक कभी किसी को धोखा नहीं दिया.

#रोमिल

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान...

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान
कभी कृष्ण तो कभी राम बनकर, पुत्र बना भगवान.

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान... 

उसकी ममता में आंगन-आंगन खेला
कभी माखनचोर तो कभी ठुमक - ठुमक चलत भगवान.

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान...

माँ के हाथों से भोजन किया, अमृतजल पिया 
कभी मुख में सौरमंडल दिखाए भगवान. 

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान...

संग - संग, खेल खेले, पीछे- पीछे दौड़ाए 
कभी आशीष पाए, कभी चरण कमल दबाये भगवान

रोमिल प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान...

#रोमिल

Thursday, February 2, 2012

माँ जब याद तुम्हारी आती है...

माँ जब याद तुम्हारी आती है, आँखों से नीर बह जाती है
व्याकुल मन तुझे पुकारता है, चारों ओर उदासी छा जाती है.
माँ जब याद तुम्हारी आती है...

बैठा रह जाता हूँ चौखट पे, सारी रैन बीत जाती है.
सारी सुधि बुद्धि पल भर में खो हो जाती है.
माँ जब याद तुम्हारी आती है...
करुणा से भरे शब्द मुख से निकलते है
आँखें मंदिर की ओर खीची चली जाती है
माँ जब याद तुम्हारी आती है...

फूलमाला से लिपटी जब तस्वीर तुम्हारी देखता हूँ
आत्मा से एक चीख-पुकार निकल आती है.
माँ जब याद तुम्हारी आती है...

माँ जब याद तुम्हारी आती है, आँखों से नीर बह जाती है
व्याकुल मन तुझे पुकारता है, चारों ओर उदासी छा जाती है.
माँ जब याद तुम्हारी आती है...

#रोमिल

Wednesday, February 1, 2012

रोमिल बचपन के दिन याद आते हैं...

"रोमिल" बचपन के दिन याद आते हैं...
जब माँ, अपने हाथों से उपले थपा करती थी...
धूप में उसे सुखाती थी...
~~~~~
अक्सर खाने के समय
मेरा दोस्तों के साथ खेलने चले जाना
माँ, का फिर पीछे
डंडी लेकर दौड़ते हुए आना
वोह जोर से चिल्ला कर कहना...
"कमीने, मरजाने" रोटी तो खा ले, फिर खेलते-मरते रहना"
"रोमिल" बचपन के दिन याद आते हैं...
~~~~~
सूरज रोज़ सुबह हँसते-खेलते हमारे घर आ जाता था
मैं चारपाई पर चादर ओढ़कर सोया-लेटा रहता था
माँ का सर पर हाथ फेरकर मुझे उठाना
वोह प्यार से कहना...
"सूरज-घर आया हैं
सूरज-घर आया हैं
देखो कितनी रोशनी
देखो कितनी खुशियाँ लाया हैं
सूरज-घर आया हैं
सूरज-घर आया हैं"
"रोमिल" बचपन के दिन याद आते हैं...
~~~~~
रात को जब आँगन में चूल्हा जला करता था
हम सब ज़मीन पर चूल्हा घेरकर रोटी खाते थे
माँ का प्यार से नंगे-नंगे पैरों में
गरम चिमटा मुझे लगाना
और डाँटते हुए कहना...
"दिन भर नंगे-नंगे पाओं घूमते रहते हो
इन पैरों को जला दूंगी"
"रोमिल" बचपन के दिन याद आते हैं...

#रोमिल

पिछले तीस सालों से तुझसे प्यार पाया था

पिछले तीस सालों से तुझसे प्यार पाया था
मैंने अपने जीवन में अदभूत खुशियों का संसार पाया था.

सीखा था तुझसे दुःख के पहाड़ पर, सुख के कमल खिलाना
मैंने ज़िन्दगी की डोर का अजब सा झूला पाया था.

पल-पल आँखों में सजते स्वपन प्यारे थे
मैंने आंधियों में भी दीपक जलने का हुनर पाया था.

तुझ पर फूल चढ़ाएँ माँ या खुद निछावर हो जाएँ    
मैंने तुझसे जीवन का अनमोल खज़ाना पाया था.

पिछले तीस सालों से माँ तुझसे प्यार पाया था.
रोमिल ने अपने जीवन में अदभूत खुशियों का संसार पाया था.

#रोमिल