Saturday, March 31, 2012

gair bankar woh shaks milta hai mujhse

gair bankar woh shaks milta hai mujhse romil
jo mujh mein basa hai rooh ki tarah.

mod diya usne meri zindagi ka asmaan
chala tha woh bahut tez haawan ki tarah.

kal raat rote-rote takiya bheeg gaya
uski yaad aai ho aansoo ki tarah.

usko galiyan dekar woh khud par sitam karta hai
log kehte hai uska ishq hai pagalon ki tarah.

Friday, March 30, 2012

जब मैं माँ के पास जाऊंगा

आँखें घड़ी से हटा लूँगा
मैं ज्यादा घूमूँगा
ज्यादा पतंगे उड़ाऊँगा
ज्यादा खेलूँगा
मैदान में खूब दौड़ लगाऊंगा
सितारों को छूऊंगा
चाँद को गले लगाऊंगा
बादलों का घर बनाऊंगा
प्रेम से सबसे बोलूँगा
प्रेम करना सबको सिखाऊंगा
जब मैं माँ के पास जाऊंगा
फिर से बच्चा बन जाऊंगा.


#रोमिल

Thursday, March 29, 2012

प्यार कभी नहीं मरता लोग मरते है

प्यार कभी नहीं मरता लोग मरते है
जिन्हें हम प्यार करते है 
दूसरी दुनिया में वो लोग हमसे मिलते है...

याद करके माँ को रोते नहीं
बल्कि ख़ुशी - ख़ुशी माँ की बातों को दोहराते करते है
दयालुता, सेवा, प्रेम के कर्मों से उन्हें जिंदा रखते है  
उपहार, गरीबों - मजबूरों में बांटते है
बाहें खोल कर बच्चों को गले लगाते है
प्यार का खज़ाना सब पर लुटाते है.

प्यार कभी नहीं मरता लोग मरते है
जिन्हें हम प्यार करते है 
दूसरी दुनिया में वो लोग हमसे मिलते है...

#रोमिल

Wednesday, March 28, 2012

माँ जब तुम रोशनी के पास गई होगी

माँ जब तुम रोशनी के पास गई होगी 
बाहें फैलाकर देवदूतों ने तुम्हारा स्वागत किया होगा.

प्रेम, ख़ुशी, शांति की भावनाएं वहां होंगी  
दर्द, कष्ट, दुःख वहां असंभव होगा.  

कुदरत भी आपकी बहादुरी के वहां कायल होगी  
आपने जो हासिल कर लिया, बहुतों को तो वहां तक पहुँचाना भी नसीब ना हुआ होगा.  

मैं जानता हूँ आप वहां भी अपने "रोमिल" को याद करती होगी  
जीवन-मृत्युं के पुल के बीच माँ-बेटे का प्रेम हमेशा कायम रहेगा. 

#रोमिल

Tuesday, March 27, 2012

माँ की आरामदायक गोद

माँ की आरामदायक गोद
जिसमें मैं चैन की नींद सोता था. 

उनकी बाँहों का दवाब
जिसमें मैं सुबकते हुए रोता था.

उनकी धीमी, मीठी मिसरी सी बोली
जिसमें मैं खो जाता था.

मुझे पीछे से जकड़कर घुमा देना
तब मैं ख़ुशी से खिलखिलाता था.

मेरे बालों को सहलाकर जब वो "मेरा बेटा" कहती है
मैं गर्व महसूस करता था.

#रोमिल

Monday, March 26, 2012

जब चलते - चलते थक जाऊं

जब चलते - चलते थक जाऊं
मेरी माँ 
पीपल, नीम, आम के पेड़ की छावं जैसे

हर पल देती मुझे आसरा 
मेरी माँ 
पंछी, नर-नारी, कीट-पतंगों को वृक्ष देता घर जैसे 

जेठ मास में धधकते सूरज से बचाती
मेरी माँ 
चबूतरे पर दूर होती थकान जैसे

मेरी हर खुशियाँ पूरी करती
मेरी माँ
नीम दातुन, मीठा आम, पीपल के वृक्ष से मिले अनेक गुण जैसे

जब चलते - चलते थक जाऊं
मेरी माँ 
पीपल, नीम, आम के पेड़ की छावं जैसे

#रोमिल

मेरी और माँ की यादें हो जैसे.

रुमालों से आती हो इत्र की महक जैसे
छुपाके संजोके रखे हो चित्र जैसे
किताबों में रखे हो गुलाब जैसे
मेरी और माँ की यादें हो जैसे.

पहली ओस की बूँद हो जैसे
बारिश में घीली मिट्टी से आती खुशबू हो जैसे
आसमान में पूरा चाँद हो जैसे
मेरी और माँ की यादें हो जैसे.

आँखों से गिरती आंसू की बूँद जैसे
लबों पे आती प्यास हो जैसे
बिन बात होंठों पे मुस्कान जैसे
मेरी और माँ की यादें हो जैसे.

बिन बात पे गुनगुनाते गीत जैसे
बिन बारिश के कड़के बादल जैसे
अनजान पते पर भेजी गई चिट्ठियाँ जैसे
मेरी और माँ की यादें हो जैसे. 

#रोमिल

Saturday, March 24, 2012

वो मेरी माँ है उसे माँ ही रहने दो

वो मेरी माँ है उसे माँ ही रहने दो
वो जीवन की पिच पर अकेली खड़ी थी
निर्बलता, दुखों से घिरी पड़ी थी
चारों तरफ उसके सामाजिक दुश्मन ही दुश्मन थे
जो उसे डराया, धमकाया करते थे.

माँ-पिता ने कभी उसकी मदद नहीं की
भाई-बहन ने कभी उसका साथ नहीं दिया
दो नन्हे बेटों की उस पर जिम्मेदारी थी
वो अकेले जीवन से लड़ रही थी
लड़ते-लड़ते वो जीवन हार चुकी थी.

रिश्तेदार उस पर दर्द भरी आह निकालते है
उस पर हँसते है
उसकी रूह को चिढाते है
उसकी मजबूरियां गिनाते है
मेरी कमजोरियां गिनाकर उसको ताना देते है.

कोई हारा हुआ खिलाड़ी कहता है उसे
कोई दुखहारी कहता है उसे
कोई मजबूर औरत कहता है उसे
कोई अकेली, आसहाय कहता है उसे.

ए नासमझों दिल के दरवाज़े खोलो
उसे निर्बल कहने वालों ज़रा ध्यान से उसकी बहादुरी को याद करो
ज़िन्दगी हारी नहीं जीती है वो
सामाजिक बंधन तोड़ के आगे निकली थी वो
दुःख के पथों पर भी मुस्कुरा के चली थी वो
मेहरबानी करके याद रखना
यह बात भूल मत जाना
वो मेरी माँ है उसे माँ ही रहने दो.

#रोमिल

Friday, March 23, 2012

माँ मैं तेरा उधार चूका सकता नहीं

माँ मैं तेरा उधार चूका सकता नहीं.
तेरा क़र्ज़ चूका सकता नहीं.

रात में पहरेदारी की 
मेरे आने के इंतज़ार में रात भर तू जागती रही.

कभी कुक, कभी शेफ़ और कभी बेकर बनकर 
स्वादिष्ट चीज़े मेरे लिए तैयार की.

मुझे साफ़-सुथरा रखा 
मेरे नाखूनों को काटा  
मेरे कानों, चेहरे की सफाई की.

बुखार में मेरे सर पर गीली पट्टी रखी  
बीमारी में मेरी देखभाल की 
मेरी घावों की सफाई की.

मेरे प्रेम के घावों को भरा 
मेरे होंठों पर मुस्कान दी. 

मनोरंजक फिल्मों को दिखाया 
त्योहारों में नए कपड़ों - जूतों की सौगाद दी.

मुझे सपने दिए 
मुझे आत्मविश्वास दिया 
मुझे राहें दिखाई 
मेरी अँधेरी राहों में रोशनी की. 

माँ मैं तेरा उधार चूका सकता नहीं 
तेरा क़र्ज़ चूका सकता नहीं.

#रोमिल

Thursday, March 22, 2012

मेरे दिल में रहती है, कहीं नहीं गई है माँ

मेरे दिल में रहती है, कहीं नहीं गई है माँ
जीवन के हर पथ पर मेरा साया है मेरी माँ.

उसके आदर्श, उसके संस्कार, उसकी सीख, मेरी हर राह को रोशन करती है
कितना धनी हूँ मैं जो वो है मेरी माँ. 

दुनिया की हर चिंता से दूर हो जाता हूँ
जब मुस्कुरा के सर पर हाथ फेर देती है मेरी माँ. 

खुद के भीतर, आमने-सामने, हर पल साथ है मेरे माँ
सब कहते है माँ जन्नत में चली गई
पर मैं कहता हूँ मेरे साथ है मेरी माँ.

#रोमिल

Wednesday, March 21, 2012

जब माँ के पास हम जायेंगे मनचाहा दिन-रात मनाएंगे.

जब माँ के पास हम जायेंगे 
मनचाहा दिन-रात मनाएंगे...

सुबह उठेंगे अपनी मर्ज़ी से 
गर्म चाय के साथ अख़बार का लुफ्त उठाएंगे 
जब माँ के पास हम जायेंगे...

नहीं मानेगें घड़ी का आदेश 
दोपहर में नहाएँगे 
ब्रेकफास्ट नहीं साथ में खाना खायेंगे 
जब माँ के पास हम जायेंगे... 

देखेंगे पसंदीदा फिल्म 
शाम को चाय - पकोड़ी संग इमली की चटनी खायेंगे 
जब माँ के पास हम जायेंगे...

रात को खाने संग खीर जरुर बनवायेंगे  
फिर माँ की गोद में आराम से सो जायेंगे 
जब रोमिल माँ के पास हम जायेंगे 
मनचाहा दिन-रात मनाएंगे...

#रोमिल

Tuesday, March 20, 2012

घुटने और कोहनियों के बल चलकर माँ के पास जाता था

घुटने और कोहनियों के बल चलकर माँ के पास जाता था
दूर से देखकर खिलखिलाता था
फिर पीछे मुुुड़
कर भाग जाता था.
बस इसी तरह घर की गैलरी में दोपहर बिताता था.

अपने हाथों को हाथों पर रखकर
मुट्ठी बंद कर
डबल बेड के बीच में सोता था
बीच में उठ - उठकर माँ को पुकारता था
बस इसी तरह अपनी दोपहर बिताता था.

तीसरी कक्षा में प्रथम श्रेणी आने पर मिली रेस कार को
गैलरी में दौड़ाता था
खूब हौ-हल्ला करता था
माँ की डांट खाता था
बस इसी तरह अपनी दोपहर बिताता था.

घोड़े के पीछे तपती दोपहर में दौड़ा करता था
न खाने-पीने की सुध रहती थी
न पढाई करता था
घर लौटने पर माँ की डांट खाता था
बस इसी तरह अपनी दोपहर बिताता था.

#रोमिल

Monday, March 19, 2012

जब कभी घर में गए दरवाज़े बंद मिले.

जब कभी घर में गए
दरवाज़े बंद मिले.

कोई नहीं अपना सगा 
सब अनजान मिले.

केसरिया शाम जब आई घर हमारे 
हम तख्त पर सोते मिले.

गंगाजल पीने के बाद विष बोले उसकी जुबान
ऐसे महबूब से हम मिले.

धीरे से बोल गई माँ मेरे कानो में
अब तुझसे "रोमिल" हम जन्नत में ही मिले.

#रोमिल

Sunday, March 18, 2012

आस्तीनों से आंसू पोछ लेता हूँ

आस्तीनों से आंसू पोछ लेता हूँ
अब माँ की तरह कोई रुमाल नहीं देता.

जीवन में मौन रहता हूँ
अब माँ की तरह कोई ख़ुशी का ठहाका नहीं देता.

शांत, अकेलेपन में खोया रहता हूँ 
अब माँ की तरह कोई जीवन में कोलाहल नहीं देता.

दुःख का कोहरा छटता नहीं
अब माँ की तरह हथेली पर कोई सूरज नहीं देता.

#रोमिल

Saturday, March 17, 2012

शाम की लालिमा में जा फँस जाता है

शाम की लालिमा में जा फँस जाता है
सूरज डूब जाता है.
बड़ा समझाता हूँ अपने नादान से दिल को
यह फिर घर की चौखट पर नज़र आता है.

घर की दीवारें देखकर यह मन कहता है
माँ का चेहरा हर जगह नज़र आता है.

काट दी जाती है जिस तरह डाली पेड़ से
माँ से जुदा होने के बाद बेटा उस तरह नज़र आता है.

जो शख्स संभाल के रखना चाहता था उसकी इज्ज़त
उसी शख्स को वो इंसान बेशर्म नज़र आता है.


#रोमिल

Friday, March 16, 2012

माँ के उपकारों को भूल जाना चाहता नहीं.

मुझे अंग्रेजी भाषा के शब्दों में अरुचि रहती थी
मेरी माँ अंग्रेजी स्कूल में जो पढ़ाती थी.
गोदी में उसकी लेटकर
मैं शब्दों को सिखा करता था
कभी A से APPLE तो कभी B से BALL लिखा करता था.

कला में हमेशा खोया रहता था
सपनो को बनाता, बिगाड़ा करता था.
कभी स्लेट पर पहाड़ी, बहती हुई नदी, उगते हुए सूरज के साथ घर बनाता था
तो कभी साड़ी का बोर्डर बनाकर माँ को दिखाता था.

गणित में मेरे पाँव हमेशा डगमगा जाते थे
पर न जाने कैसे इतने अच्छे मार्क्स आ जाते थे
आज भी त्रिकोण, दशमलव मेरी समझ के बाहर है
माँ को भी तो गणित पढ़ाते पसीने आ जाते थे.

कितने बरस तक यह पल याद रहेंगे
पढाई की बातें, दशा याद रहेगी
मन इनसे पीछा छुटाना चाहता नहीं
माँ के उपकारों को भूल जाना चाहता नहीं. 

#रोमिल

Thursday, March 15, 2012

जब माँ खेल खिलाती थी.

दुनिया सिमटकर 
आंगन बन जाती है 
जब माँ खेल खिलाती थी.

घर के पास बने पार्क में 
झूला झुलाती थी 
हरी घास पर नंगे पाँव चलवाती थी.

पढाई के वक्त 
हवा के लिए मेज के सामने वाली खिड़की खोल देती थी 
दूध से भरा गिलास पिलाते थी.

माँ के साथ रहकर  
मैं कभी एकान्त नहीं होता था 
माँ मेरा हर पल ख्याल रखती थी.

#रोमिल

Wednesday, March 14, 2012

छिप-छिप के आंसू मत बहाओ

छिप-छिप के आंसू मत बहाओ
यह हीरे-मोती है इनको व्यर्थ मत गवाओ
नयन में सेज के इनको रखो
सावन के पानी की तरह मत बहाओ.

बिखर गई ज़िन्दगी की माला है तो क्या
दीपक भूझ गए है तो क्या
तूफ़ान में टूटा घर है तो क्या
चेहरे पर शिकन मत लाओ
छिप-छिप के आंसू मत बहाओ.

देखो माँ चाँद से मुखड़े को देख रही होगी
तेरी कामयाबी की दुआ कर रही होगी
किसी फ़रिश्ता को तेरी हिफाजत सौप रही होगी
चाँद से मुखड़े पर नाराज़गी मत लाओ 
छिप-छिप के आंसू मत बहाओ.

#रोमिल

Tuesday, March 13, 2012

क्रीम लगाने से लड़की नहीं पटती.

टाइम पास 

कलम बदलने से तकदीर नहीं बदलती,
रंगीन चश्मा पहनने से ज़िन्दगी रंगीन नहीं लगती,
तू कितना भी लगा ले मर्दों वाली क्रीम
क्रीम लगाने से लड़की नहीं पटती. 

#रोमिल

हा हा...

कहने को माँ रोज घर मैं जाता हूँ

कहने को माँ रोज घर मैं जाता हूँ
पर कहाँ घर जैसा सुख-शांति-संतोष मैं पाता हूँ.

हवा जैसे बालकनी में अटक गई हो
फर्श पर जैसे उदासी फैली पड़ी हो
दहलीजों को आने-जाने वालों से कोई मतलब न हो
पसीजती दीवारों में चहरे की लकीरें पड़ी हो.

कहने को माँ रोज घर मैं जाता हूँ
पर कहाँ घर जैसा सुख-शांति-संतोष मैं पाता हूँ.

रातें, रात बार जागते रहती है
सुबह भी सूरज को कहीं दूर छोड़कर आती है
बादल गरजते है, बरसते नहीं
बूँदें आँगन से कहीं दूर गिर जाती है.

कहने को माँ रोज घर मैं जाता हूँ
पर कहाँ घर जैसा सुख-शांति-संतोष मैं पाता हूँ.

भोजन में पहले जैसा स्वाद नहीं लगता
पूजा में मन-भाव नहीं लगता
वस्त्र अब तन पर शोभा नहीं देते
छत के कोनों से जाले उतारने को मन नहीं करता.

कहने को माँ रोज घर मैं जाता हूँ
पर कहाँ घर जैसा सुख-शांति-संतोष मैं पाता हूँ.

#रोमिल

Monday, March 12, 2012

इस तरह ही कुछ पिछले दिनों से ज़िन्दगी कट रही है माँ.

पसीजते घर की दीवारों में तेरे चेहरे की छाया नज़र आती है
इक्के-दुक्का गली से गुजरने वाला इंसान तेरी सच्ची-झूठी बातें कह जाता है
धीरे - धीरे कमरे में रात उतरती है
लैपटॉप में आकर कही खो जाती है
जमुहाई लेकर सुबह उठाती है
झुरमुट लेकर चिड़िया चिचिहाती है
कंधे पर बैग टांगे मैं घर से निकल पड़ता हूँ 
इस तरह ही कुछ पिछले दिनों से ज़िन्दगी कट रही है माँ.

#रोमिल

Sunday, March 11, 2012

रह - रह कर माँ ध्यान तुम्हारा आया.

आज दिन कुछ इस तरह बिताया
रह - रह कर माँ ध्यान तुम्हारा आया.

चन्दन- धूप से की शिव की आरती, तुझे फूल चढ़ाया
रह - रह कर माँ ध्यान तुम्हारा आया. 

झर झर के बहे आंसू, तुम्हारी तस्वीर को गले लगाया
रह - रह कर माँ ध्यान तुम्हारा आया.

काफी की चुस्की के साथ जब पाव - भाजी खाया
रह - रह कर माँ ध्यान तुम्हारा आया. 

चाँद के संग जब तारों का झुण्ड अंगने में आया
रह - रह कर माँ ध्यान तुम्हारा आया.

आज दिन कुछ इस तरह बिताया
रह - रह कर माँ ध्यान तुम्हारा आया.

#रोमिल

Saturday, March 10, 2012

माँ तुम्हे क्या में अपनी आप बीती सुनाऊ

माँ तुम्हे क्या मैं अपनी आप बीती सुनाऊ
यह आंसू पल भर में आ जाते है.

मन विचलित सा रहता है
खुशियों के फूल पल भर में बिखर जाते है.

दिमाग में चलते-फिरते एक बेचैनी सी रहती है
सपने भी धुआं सा हो जाते है

जीवन में काम हजारों है
दौड़ धूप के बीच आराम के पल खो जाते है.

सब कुछ पास होते हुए भी 
यह हाथ खाली हाथ ही रह जाते है.

माँ तुम्हे क्या मैं अपनी आप बीती सुनाऊ
यह आंसू पल भर में आ जाते है.

#रोमिल

Friday, March 9, 2012

कोना-कोना

कल दिन भर,
रात भर देखता रहा घर के कमरे का कोना-कोना

तेरी तस्वीर पर माला लिपटी
धूल-मिट्टी से भरा हर कोना-कोना

सुनी सी छत
पसीजती दीवारें
खामोश हवा
अलग-थलक पड़ा बिस्तर की चादर का कोना-कोना.

बेहद नीरस, बेहद उदास, बेहद परेशां
दिखा यह मंज़र
जैसे तुझे रो-रोकर माँ पुकार रहा हो घर का कोना-कोना.

#रोमिल

Thursday, March 8, 2012

माँ तेरे लिए...

गेंदे-गुलाब की माला और फूल बरसता है,
माँ तेरे लिए अबीर-गुलाल बरसता है.

नैनो की ज्योति यह खुशियों का हुडदंग बरसता है,
माँ तेरे लिए जीवन का सुर-संगीत बरसता है.

जो कुछ मेरा है सब तुमको अर्पित,
माँ तेरे लिए यह सांसों का कण-कण बरसता है.

ग्रहण करो माँ रोमिल का प्रणाम इस त्यौहार में,
माँ तेरे लिए परंपरा का श्रृंगार बरसता है.

#रोमिल

Wednesday, March 7, 2012

बीत गया होली का त्यौहार.

बिस्तर पर चादर ओढ़े हम लेटे रहे 
बीत गया होली का त्यौहार.

न रंग खेला किसी से 
न लिखा कोई सदविचार. 
बीत गया होली का त्यौहार.

खिड़की, दरवाज़े पर पड़ा रहा पर्दा 
कभी टी.वी. देखा 
कभी एस.एम.एस. किया 
कभी पढ़ा अख़बार 
बीत गया होली का त्यौहार.

माँ को याद किया 
तस्वीर पर गुलाल का लगाया टीका 
फिर गुलाब-गेंदा की माला से किया माँ का श्रृंगार 
बीत गया होली का त्यौहार. 
रोमिल बीत गया होली का त्यौहार.

#रोमिल

Tuesday, March 6, 2012

धन्य - धन्य है मेरी माता जिसने मुझे इंसान बनाया

धन्य - धन्य है मेरी माता जिसने मुझे इंसान बनाया
अपने स्नेह, ममता, प्यार से मुझे जीने लायक बनाया
देकर ज्ञान की ज्योति, मन में विश्वास जगाया
देकर परिश्रम के पंख मुझे उड़ने योग बनाया.

धन्य - धन्य है मेरी माता...

#रोमिल

सुन्दर चहरे नहीं, सुन्दर काम करने वाले को चुने.

सूंदर चहरे नहीं, सुन्दर काम करने वाले को चुने.

Monday, March 5, 2012

माँ काश मैं बच्चा ही रहता

माँ काश मैं बच्चा ही रहता
तेरी गोद में ही सोता
तेरा आँचल पकड़ - पकड़ कर फिरता
कभी न तेरा साथ छोडता...

खिलौने से तू मुझे खिलाती
रोज़ सवेरे मुझे सुसज्जित करती
राजा - रानी की कहानी सुनाती
अपने कर कमलों से मुझसे भोजन कराती

माँ काश रोमिल बच्चा ही रहता
कभी ना तेरा साथ छोडता...

#रोमिल

होली के मौसम में जब लोग होली खेला करते हैं

होली के मौसम में जब लोग होली खेला करते हैं
हम छत पर अकेले बैठे तुमको याद किया करते हैं...
~~~
पानी से जब लोग, एक - दूसरे को भिगोया करते हैं
हम आंसूओं से खुद को भीगो लिया करते हैं...
~~~
रंगों से जब लोग चेहरे को रंग देते हैं
हम रंगों में तेरी तस्वीर ढूंढा करते हैं...
~~~
जब शाम होती हैं
चाँद भी तन्हा अकेला होता हैं
हम छुपे-छुपे से छत पर बैठे 
चाँद संग होली खेला करते हैं...
~~~
होली के मौसम में जब लोग होली खेला करते हैं
रोमिल हम छत पर अकेले बैठे तुमको याद किया करते हैं...

#रोमिल

सोच रहा हूँ इस बार होली कुछ इस तरह मनाऊँ...

ये मेरी राधा...
ओह राधा
सुनो न राधा...

एक संगेमरमर की मूर्ति तेरी बनाऊँ
उसे लाल, गुलाबी, पीले, नीले, हरे रंगों से सजाऊँ
सोच रहा हूँ इस बार होली कुछ इस तरह मनाऊँ...

सफ़ेद रंग का सलवार कुर्ता
सफ़ेद रंग की तुझे चुनरी पहनाऊँ
लाल रंग की तुझे मारू पिचकारी
गुलाबी रंग का गुलाल लगाऊँ
सोच रहा हूँ इस बार होली कुछ इस तरह मनाऊँ...

तेरे स्वागत में घर के दरवाजे पर रंगोली सजाऊँ
तुझ पर फूलों की वर्षा करवाऊँ
अपनी हाथों से तुझे गुजिया खिलाऊँ
रोमिल की तुझे अर्धांगिनी बनाऊँ
सोच रहा हूँ इस बार होली कुछ इस तरह मनाऊँ...

#रोमिल

Sunday, March 4, 2012

FATEHPUR SIKRI - AGRA AND TAJ MAHAL - AGRA









FATEHPUR SIKRI - AGRA AND TAJ MAHAL - AGRA







FATEHPUR SIKRI - AGRA AND TAJ MAHAL - AGRA







FATEHPUR SIKRI - AGRA AND TAJ MAHAL - AGRA







माँ तुम आ जाओ

नयन से बहते हुए आंसू पुकार रहे है माँ तुम आ जाओ.
मौन के बंधन सब टूट के कह रहे है माँ तुम आ जाओ.
रखो मेरे पग के साथ अपने पग चलो कुछ दूर साथ चले, माँ तुम आ जाओ.
ममता से वंचित इस मन को फिर प्रफुल्लित कर जाओ, माँ तुम आ जाओ.
फिर पकड़ के खड़ा रहूँ आँचल तुम्हारा, माँ तुम आ जाओ.
ग़मगीन सिसकियों को मधुर मुस्कान में मिलाने, माँ तुम आ जाओ.
लौट आओ माँ
आशा का दीपक भुझ न जाये, ज्योति तुमको पुकार रही है, माँ तुम आ जाओ.

#रोमिल

चीनी है?

माँ एक टाइम पास सुनो...

रोमिल - चीनी  है? 
पड़ोसन - दरवाज़े पर रुको पांच मिनट.
यह लो आधी कटोरी चीनी है.
 
रोमिल - नहीं मुझे चीनी नहीं चाहिए.  
पड़ोसन - मगर तुम ही तो पूछ रहे थे? 
 
 रोमिल - वोह पडोसी होने के नाते इतना तो फ़र्ज़ बनता है कि पूछ ले कि कहीं पडोसी के यहाँ कुछ कमी तो नहीं है.   

हा हा

Saturday, March 3, 2012

गोबर से जब माँ आंगन को लीपा करती थी

गोबर से जब माँ आंगन को लीपा करती थी...
मुख से जपुजी साहिब, सुखमनी साहिब, गुरबानी वचन जब बोला करती थी.

खड़ाऊ, रसोई घर के बाहर ही रखती थी
चूल्हा जलाने से पहले वंदना किया करती थी.

जाड़े में नहलाकर चटाई पर धूप सिखवाती थी
माथे पर चन्दन का टिका लगाती थी.

रोमिल, माँ जब मेरे पास होती थी
मेरी हर प्रभात शुभ होती थी.

#रोमिल

aa jao kyunki yeh long distance relationship chalta hi nahi hai.

aa jao kyunki yeh long distance relationship chalta hi nahi hai.

आ जाओ क्योंकि यह लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप चलता ही नही है...

#Romil
#रोमिल

Friday, March 2, 2012

कभी - कभी यूं भी होता है

कभी - कभी यूं भी होता है
साथ मीलों तक बस खाली रास्ता चलता है.

दिन भर करता है भजनों से शिव का श्रृंगार
मन उसके दर्शन को तड़पता है.

चोट खाकर उसने तोडा है दर्पण
यह बात क्यों नहीं चेहरा देखने वाला समझता है.

हर छलकते आंसू को करता है प्यार 
रोमिल, हर छलकते आंसू को करता है प्यार 
हर बूँद में उसे माँ का चेहरा दिखता है...

#रोमिल

माँ तेरे लिए लाया हूँ

माँ तेरे लिए लाया हूँ...

कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ फूल और कुछ मोमबत्तियां
बड़े सरेज के रखे थे दु:खभरी ज़िन्दगी में
कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ फूल और कुछ मोमबत्तियां.

अपनी उँगलियों से पकड़कर तुझे साथ चलाना चाहता था
भाग दौड़ से भरी ज़िन्दगी में तुझे अपनी गोद में आराम कराना चाहता था
मेरा संगीत जगाता तुझे
मीठी लय से तुझे सुलाना चाहता था
माँ तेरे लिए लाया हूँ
कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ फूल और कुछ मोमबत्तियां.

मधुर बच्चों सी हंसी तेरे होंठो पर चाहता था
माथे पर तेरे चाँद चाहता था
तारों की तरह हमेशा तेरे चारों तरफ रहना चाहता था
तेरे सारे जीवन का भार उतार देना चाहता था
माँ तेरे लिए लाया हूँ
कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ फूल और कुछ मोमबत्तियां.

#रोमिल

Thursday, March 1, 2012

नज़र आती है...

बढ़ती उम्र में यह बात समझ आती है
किसी के चहरे पर इंतज़ार की घड़ियाँ नज़र आती है...

धुंधली सी एक दूर परछाई सी नज़र आती है
खामोश उदास सी मोड़ पर खड़ी हुई है
अपने बच्चों से बिछड़ी माँ नज़र आती है...

छुप - छुप के निहारा करती
उसकी हज़ार इच्छाएं नज़र आती है
ढेर सारी आँखों में संजोये सपनों की बारात नज़र आती है...

मृत्युं के बाद भी इंसान किस तरह तरफ्ता है
रोमिल मृत्युं के बाद भी इंसान किस तरह तड़पता है 
उसकी बेबसी की कहानी नज़र आती है...

#रोमिल

माँ होती है बच्चों के लिए विद्या की खान.

विद्या का देती है खुला दान
कंठ में वाणी भर सिखाती है अमृतबान
शब्दों की रचना, अर्थ की पहचान
भाव, रूप, छंद, वेदों का ज्ञान
माँ होती है बच्चों के लिए विद्या की खान. 
रोमिल माँ होती है बच्चों के लिए विद्या की खान.

#रोमिल
***
पढ़ाती है मन से
हाथ की उंगलियाँ पकड़ कर करती है जतन
कभी संग गुनगुनाती है
कभी चित्र बनाती है
कभी लोक व्यवहार सिखाती है
कभी व्यायाम 
तो 
कभी कमरे को शिक्षा के संदेशों से सजाती है
माँ जब बच्चों को पढ़ाती है.
रोमिल माँ जब बच्चों को पढ़ाती है.

#रोमिल