Saturday, October 16, 2010

हमारी ज़िन्दगी बेमानी हो गई थी...

जिससे मिलकर अपनी ज़िन्दगी सुहानी हो गई थी
उसकी नज़र में हमारी ज़िन्दगी बेमानी हो गई थी...

#रोमिल

Friday, October 15, 2010

मैं वो किताब हूँ जिसमे कोई राज नहीं...

मैं वो किताब हूँ जिसमे कोई राज नहीं...

ज़िन्दगी-ए-उम्र बीत गई एक दिया बनाने में...

दिल-ए-खवाइश थी चाँद बनाने की
मगर ज़िन्दगी-ए-उम्र बीत गई एक दिया बनाने में...

#रोमिल

मेरे सपने मेरी नींदों में उड़े.

चिराग जले और धुंआ उड़े   
मेरी बर्बादी के किस्से कहाँ - कहाँ उड़े.
*
खुदा न जाने कैसा मौसम उमड़ कर आया हैं
इन गर्दिशों में ना जाने कितने झोपड़े उड़े.
*
बस एक कशमकश और मैं बेबस
वो किसी की बाहों में दिखे तो मेरे होश उड़े...
*
टूटा इस तरह मेरा गुरूर  
मेरे सपने मेरी नींदों में उड़े...

#रोमिल

Wednesday, October 13, 2010

रेज़ा - रेज़ा अरमान जलाये अपनों के लिए...

बहुत गम उठाए अपनों के लिए
दुश्मन भी बनाये अपनों के लिए...
*
छोटी सी उम्र में गम-ए-समुन्दर से खेला
तूफानों से भी भिड़ गए अपनों के लिए...
*
ठंडी - ठंडी हवा के झोंके को छोड़कर
शोले पर सोये अपनों के लिए...
*
चार दिवारी में बंद रखी अपनी ख्वाइश
रेज़ा - रेज़ा अरमान जलाये अपनों के लिए...

#रोमिल

Saturday, October 9, 2010

किसी की सच्ची मुहब्बत को ऐसा न ठुकराना चाहिए था...

बेवफा ज़माने से जो की थी वफ़ा
मुझे तो धोखा खाना ही चाहिए था...
उससे यूँ न जाना चाहिए था
मुझे और तरफाना चाहिए था...
*
बहुत हैरत हुए उसका मासूम सा चेहरा देख कर
खुदा तुझे शैतान को इतना मासूम न बनाना चाहिए था...
*
अजब था यह मुहब्बत का सफ़र अपना
बंद कमरों में यूं न आंसू बहाना चाहिए था...
*
ये उसकी हार थी या फिर मेरी जीत दोस्तों
किसी की सच्ची मुहब्बत को ऐसा न ठुकराना चाहिए था... 
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Friday, October 8, 2010

मैं जिस मुहब्बत को तलाशता हूँ

मैं जिस मुहब्बत को तलाशता हूँ
मेरे दोस्तों तुम भी उससे तलाशो
मिल जाएगी वोह कहीं तलाशते-तलाशते ....
*
कोइए फूल होगी वोह
कोइए चाँद होगी वोह
तुम जलाते रहना नैनो के दिए उसे तलाशते-तलाशते .... 
*
हुस्न की रोशनी से न मन को मैला करना  
यह शहर हैं आइनों का
सबकी नज़र से खुद को बचा के रखना उसे तलाशते-तलाशते....
*
हर राह गुलशन होगी तेरी
खुदा भी होगा तेरा निगेबाह उससे तलाशते-तलाशते.... 
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