Friday, November 19, 2010

देखने में निशानी है उसकी मगर किसी ज़ख्म से कम भी नहीं...

साथ छूटे मगर रिश्ता टूटा ही नहीं
उसने मुझे भूला दिया लेकिन मैंने उसे भुलाया ही नहीं...
*
साथ चले थे क़दम दर क़दम कोई मंजिल थी नहीं
उससे दूर हुए उसके साये से नहीं...
*
किससे कहे अपने बर्बाद-ए-ज़िन्दगी की कहानी   
वैसे तो हजारों है अपने, मगर कोई अपना भी नहीं...
*
उसने मुझे छुआ था किसी रोज़ ख़्वाब में
देखने में निशानी है उसकी मगर किसी ज़ख्म से कम भी नहीं...

#रोमिल

Thursday, November 18, 2010

कनेडा वाली कुड़ी पसंद आ गई...

कनेडा वाली कुड़ी पसंद आ गई...
ओह कनेडा वाली कुड़ी पसंद आ गई...
अरे मूंदे दे दिल पर कमाल कर गई
कनेडा वाली कुड़ी पसंद आ गई...
हाँ कनेडा वाली कुड़ी पसंद आ गई...
*
मुंडा तोह रे अपना वेल्ला ही रहता था
रातों को रे मोहल्ले में घुमाता फिरता रहता था
घरवालों ने पैरों में सोहनी सी ज़ंजीर पा दी..
कनेडा वाली कुड़ी पसंद आ गई...
ओह कनेडा वाली कुड़ी पसंद आ गई...
*
मुंडा अब अपना सज-धज के सीधे जाता है ऑफिस
हर काम मेहनत से करता है फिनिश
दोस्तों से यारी दूर हो गई
हाँ यारों दोस्तों से चेटिंग दूर हो गई
कनेडा वाली कुड़ी पसंद आ गई...
ओह कनेडा वाली कुड़ी पसंद आ गई...

हा हा हा हा हा

#रोमिल

परिंदा तेरा शाख पर बोलना...

आज भी कितना दर्द देता हैं
परिंदा तेरा शाख पर बोलना...
किसी की याद दे जाता हैं
परिंदा तेरा शाख पर बोलना...
कोई आने वाला हैं, एहसास दे जाता हैं
परिंदा तेरा शाख पर बोलना...
घर के मुंडेर से कोई चुपके से लौट रहा हैं, बता देता हैं... 
परिंदा तेरा शाख पर बोलना...

#रोमिल

Wednesday, November 17, 2010

अब्बा जान ईद आ गई...

मुफलिसों के चहरे पर उम्मीद की किरण आ गई
आँखें उठी और चाँद के दीदार को आ गई
रोशनी सी घर भर में फ़ैल गई
लग गए मेले
बाज़ारों में रौनक आ गई
मेरे दोस्त ने जब कहाँ
अब्बा जान ईद आ गई...

#रोमिल

JO MERE JAISA HO

khuda kisi ko aisa bana
JO MERE JAISA HO

khuda kisi aise se mila
JO MERE JAISA HO

Jo mere mann ko samjhe
Jo meri nazar se dekhe
Jo ho mujhsa aur main hu ussa

khuda kisi ko aisa bana
JO MERE JAISA HO...

खुदा किसी को ऐसा बना 
जो मेरे जैसा हो...

खुदा किसी ऐसे से मिला 
जो मेरे जैसा हो... 

जो मेरे मन को समझे 
जो मेरी नजर से देखें 
जो हो मुझसा और मैं हूं उस सा... 

खुदा किसी को ऐसा बना 
जो मेरे जैसा हो...
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bas nazar-nazar ka fark hota hai
kisi ki nazar mein BEWAFAI
kisi ke nazar mein WAFA hota hai...
बस नजर-नजर का फर्क होता है 
किसी की नजर में बेवफाई 
किसी के नजर में वफ़ा होता है...

#ROMIL
#रोमिल

Tuesday, November 16, 2010

पूछो न यारों किसी क़दर वो रात बिताई थी...

सबसे नज़र बचा कर वो मुझसे मिलाने आई थी
पूछो न यारों किसी क़दर वो रात बिताई थी...
*
कुछ तो सर्दी का आलम था
कुछ जिस्म भी अपना गरम था
दूर-दूर खड़े थे दोनों
आँखों से शमा जलाई थी...
पूछो न यारों किसी क़दर वो रात बिताई थी...
*
मेरी गोद में लेटकर
बाज़ुओं में मेरी उसने मुहब्बत की नयी दुनिया सजाई थी  
पूछो न यारों किसी क़दर वो रात बिताई थी...
*
चूडियो की खनखनात
पायल की झंकार
चाँद ने छत पर सफ़ेद चांदनी बिछाई थी
पूछो ना यारों किसी क़दर वो रात बिताई थी...
*
उसके दुपट्टे का मेरे चेहरे पर उड़ना
होंठो का बेबसी सा तड़पना 
खुदा ने भी कैसे शर्म की निगाह बनायी थी... 
पूछो ना यारों किसी क़दर वो रात बिताई थी...

#रोमिल

कितना मुश्किल होता हैं

उजड़े हुए वृक्ष पर कोयल का बोलना
कितना मुश्किल होता हैं
मकान को घर बोलना...
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साथ चलने वाले को कभी परखा नहीं
कितना मुश्किल होता हैं
उसे हमसफ़र बोलना...
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पैसे और औदे की बैसाखी पहने हुए
कितना मुश्किल होता हैं
उसे सरकार बोलना...
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चंद सिक्को में बेच दी शहीदों की कुर्बानी
कितना मुश्किल होता हैं
उसे आदर्श सोसाइटी बोलना...

#रोमिल