Friday, December 10, 2010

चाँद कहो तोह...

ओ नूर-ए-नज़र चाँद
चाँद आप कहो तो...
आपके कानो में झुमका पहना दूं...
चहरे पर आती हुई लट को हटा दूं...
दिल-ए-आरज़ू यह भी है 
आपको पायल पहना दूं...
गुस्ताखी तो यह भी करने को मजबूर-ए-दिल चाह रहा है 
आपके बालों में गुलाब लगा दूं...
देखो कहीं न सीडियो पर आपका पैर फिसल जाये
आपको बाहों में उठा दूं...
देखो बीत न जाये यह रात आँखों में 
आपको, अपनी गोद में सुला दूं.. 
चाँद आप कहो तो...

#रोमिल

ज़मीर ना अपना गिरने पाए...

चलो यार भूख से मर जाये
ज़मीर ना अपना गिरने पाए...
*
सर कटा दे यार शान से
किसी बेरहम के सामने सर झुकने ना पाए...
*
कटपुतली का यह कैसा बाज़ार लगा हैं
हम इंसान हैं
कटपुतली ना बन पाए...
*
शैतान की गिरफ्त से दूर रखो 
यह मुस्लिम हैं
यह हमारे भाई हैं 
यह अजमल कसाब ना बन पाए...

#रोमिल

Thursday, December 9, 2010

जैसे...

मेरे माथे पर उसका लब
सितारा हो जैसे...
मैं उसमे समाऊँ 
गुलाब में भंवरा हो जैसे... 
*
चाँद की चाँदनी
उसका आँचल हो जैसे
मैं आँखों में खो जाऊँ
सुनहेरा ख़्वाब हो जैसे...
*
उसकी करवट से जाग जाये
सूरज हो जैसे...
मैं उसके ख़्यालों में खो जाऊँ
बादल में छुपा चाँद हो जैसे...
*
उसके गेसू से उलझा रहूँ
काँटों में फंसा दुपट्टा हो जैसे...    
मैं बे-मौसम ही बरस जाऊँ
धूप में बरसात हो जैसे...

#रोमिल

इस सर्दी के मौसम में बर्फ सी होगी.

जब वो अकेली होगी
इस सर्दी के मौसम में बर्फ सी होगी.
जब मेरे एहसास से लिपटी होगी
पानी सी पिघल गए होगी...
*
चाँद को देखा होगा इतराते हुए  
घूँघट में ढक गई होगी.
तस्वीर को मेरी चुमते हुए
इंतज़ार कर रही होगी...
*
गहनों से सजी सवरी होगी
पायल भी उसकी खनक रही होगी.
जब किसी ने दरवाज़ा खटखटाया होगा
सीढ़ियों से दौड़कर उतरी होगी...
*
मुझे ना देखकर 
नज़रे नीचे की होगी
फिर वो तन्हा छत पर गई होगी
इस सर्दी के मौसम में बर्फ सी होगी.

#रोमिल

Wednesday, December 8, 2010

चलो गम की बारिश में भीग लेते है...

चलो गम की बारिश में भीग लेते है
किस्से पुराने कह लेते है..
*
हर तरफ छाए हुए है गर्दिशो के बादल
चलो कुछ पल साथ बैठ लेते है
किस्से पुराने कह लेते है..
*
नींद का हल्का - हल्का गुलाबी सा झोखा आ रहा है
चलो कुछ पल तुम्हारे आँचल में सो लेते है
लेट लेते है...
किस्से पुराने कह लेते है...
*
बेचैनी बहुत है
घबराहट भी बहुत है
आज यह ज़ंजीर तोड़ देते है
चलो कुछ पल बीते गिले शिकवे कह लेते है   
किस्से पुराने कह लेते है...
*
आदत कुछ ऐसे बनी हुई है अपनी रोमिल
जिस किसी से मिले,
रिश्ता अपना जोड़ लेते है
चलो कुछ ख़्वाबों में खो लेते है
किस्से पुराने कह लेते है...

#रोमिल

समेट लूं...

कही बह ना जाये इसमें अपना रिश्ता 
उससे मिलने से पहले 
मैं अपनी आँखों का समुन्दर समेट लूं
*
बड़ी जोर आया हैं तूफ़ान अबकी बार
कही बह ना जाऊँ, उससे पहले
यादें समेट लूं.
*
वक़्त के साथ - साथ रंग बदलते रहे अपने
उससे पहले दुश्मन हो जाये
दोस्त समेट लूं..
*
आजकल जिसे देखो खुदा बनने में लगा हैं
उससे पहले इंसान ना रह जाये
इंसान समेट लूं...

#रोमिल

Tuesday, December 7, 2010

मुमकिन नहीं दुनिया-ए-जहाँ मुझसे छीन ले

मुमकिन नहीं दुनिया-ए-जहाँ मुझसे छीन ले
तेरी याद मेरे सीने से लिपटी रहेगी...
*
वक़्त के सफ़र में हम नहीं होंगे साथ
मेरी नज़रे तेरे इंतज़ार में लिपटी रहेगी...
*
ख़त पढ़ते ही आ जाएगी होंठों पर मुस्कान
तेरी छाँव, मेरी धूप से लिपटी रहेगी...
*
कभी यूँ सुना तेरा नाम हवाओं से 
तेरी आवाज़ मेरे कानो से लिपटी रहेगी...
*
सावन के महीने में  
बारिश की बूँदें लिपटी रही डालियों से
तेरी महक मेरे जिस्म से लिपटी रहेगी...

#रोमिल