Saturday, March 12, 2011

जाने यह कैसा शहर है...

कोई खफ़ा हो जाता है
कोई जुदा हो जाता है
जाने यह कैसा शहर है
हर अपना, बेगाना हो जाता है...

जिसको चाहो वो मिलता नहीं
कोई इसे बेवफाई
कोई नसीबो का खेल कह जाता है...

मिलने की लाख कोशिश करते है फिर भी मिल नहीं पाते
रात ना कटे तन्हाई में
कोई इसलिए ख़्वाब दे जाता है...

इस शहर में पूरी ना हो सकी मोहब्बत जिसकी रोमिल 
वो जन्नत में मिलने का वादा दे जाता है...

जाने यह कैसा शहर है...

#रोमिल

Friday, March 11, 2011

बड़ी अजीब सी मोहब्बत-ए-ज़िन्दगी बिताई है मैंने....

बड़ी अजीब सी मोहब्बत-ए-ज़िन्दगी बिताई है मैंने
चाँद न मिला
सितारे तो बहुत पाए है मैंने...

तुम काँटों से डरते हो यारों 
फूलों से भी ज़ख्म खाए है मैंने... 

लहरों से मेरी दुश्मनी रही है बरसो से
साहिल पर बहुत घर बनाये है मैंने...

अपनी तमाम बर्बादियों को भूलकर
दोस्त क्या... दुश्मन भी गले लगाये है मैंने...

वो हकीक़त में तुझे ना मिल सका रोमिल
तो गम न कर... २ 
खवाबो में उसके साथ कई रात बिताई है मैंने...

बड़ी अजीब सी मोहब्बत-ए-ज़िन्दगी बिताई है मैंने...

#रोमिल

ख़ुशी

हमने तो हमेशा रब से उसकी ख़ुशी मांगी रोमिल
पर यह नहीं जानते थे कि हमें छोड़ने में उसकी ख़ुशी छुपी है...

#रोमिल

Thursday, March 10, 2011

काश

काश यह सच उससे सुन लेते तो रातभर सुकून से सो लेते हम रोमिल
"मुझे तुमसे मोहब्बत नहीं सिर्फ तुम्हारी जरुरत थी"

#रोमिल

नाज़ुक

बहुत नाज़ुक है मेरा हुस्न ए यार रोमिल 
हाथ ज़ख्मी कर लेता है फूल से खेलते-खेलते...

#रोमिल

Wednesday, March 9, 2011

जन्नत को ज़मीन पर महसूस करके देखो

जन्नत को ज़मीन पर महसूस करके देखो
तुम एक बार रूह-ए-मोहब्बत करके देखो...
***
खवाबों में भी मिल जाती है मंजिले - २  
तुम सनम को अपने करीब बैठे हुए देखो...
***
कहीं न कहीं होगा करीब तेरे पास ही खुदा मोहब्बत का  
तुम ज़रा नज़रे उठाकर देखो... 
*
मोहब्बत के पन्ने पर सिर्फ तेरा ही नाम होगा रोमिल - २  
तुम एक बार मोहब्बत में तमाशा बनकर तो देखो...  
*
जन्नत को ज़मीन पर महसूस करके देखो...

#रोमिल

वजह

अपनी हार की यह भी वजह हो सकती है रोमिल 
जो चीज़ हम मांगते है वो खुदा को भी प्यारी होती है...

#रोमिल