Saturday, April 23, 2011

बहुत छोटी सी बात हैं दोस्त के एहसानों के सामने...

एक टूटा हुआ घर हैं दुनिया मेरे सामने 
रब भी कुछ नहीं हैं मेरी दोस्ती के सामने...
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कहने को तो सबने चहरे पर चहरे लगा रखे हैं 
मगर सारे नकाब उतर जाते हैं मेरे सामने...
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कौन खरीद सकता हैं मुझसे मेरी दोस्ती 
यह दौलत भी मिट्टी हैं मेरे सामने...
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चाहत तो इतनी हैं आसमान में दोस्त का नाम लिख दूं रोमिल  
मगर कुछ नहीं कर पाया अपनी मजबूरियों के सामने...
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ऐसी सौ ज़िन्दगी लूटा सकता हूँ दोस्त के लिए रोमिल  
बहुत छोटी सी बात हैं दोस्त के एहसानों के सामने...

#रोमिल

Friday, April 22, 2011

ज़िन्दगी

यह ज़िन्दगी भी ताश के पत्तों की तरह होती हैं रोमिल 
किसी को बादशाह तो किसी को गुलाम बना देते हैं...

#रोमिल

Thursday, April 21, 2011

रेत में फूल खिल

रेत में फूल खिल गए,
उसकी याद आई और रोमिल होंठ तुम्हारे खिल गए!

#रोमिल

Wednesday, April 20, 2011

रब...

रब मेरे ख़्वाबों की दुनिया 
तेरी हकीक़त की दुनिया से कही अच्छी हैं...
*
रब मेरी रब-ए-महबूब 
तेरे मिट्टी के भगवानो से कही अच्छी हैं...
*
रब क्या सिखाएगी तेरी किताबें मुझे ज़िन्दगी जीना 
मेरे रब-ए-महबूब की हिदायत तेरी किताबों से कही अच्छी हैं...

#रोमिल

Tuesday, April 19, 2011

वफादार

तेरी जैसी ही वफादार है तेरी कब्र...
छोटे-छोटे पौधे लगाऊँ तो फूल खिला देती है...

#रोमिल

Monday, April 18, 2011

दोस्ती के वादे

रोना चाहूं, तब भी रो नहीं पाता हूँ रोमिल,
दोस्ती के वादे भी कितने अजीब होते हैं.

#रोमिल

Sunday, April 17, 2011

मनाना बहुत आसान हैं...

रोमिल उस रब को मनाना बहुत मुश्किल हैं 
न जाने कौन-कौन से जतन करने पड़ते हैं...

पर मेरी दोस्त को मनाना हुत आसान हैं 
"सजदे में सर झुकाओ 
दिल से उसको बुलाओ 
बस थोडा सा तुम मुस्कुराओ
आँखों से उसके नाम को लगाओ..."

#रोमिल