Saturday, February 4, 2012

Zindagi Jab Mayush Hoti Hai Tabhi Mehsus Hoti Hai

"Zindagi Jab Mayush Hoti Hai Tabhi Mehsus Hoti Hai"

#Romil

ज़िन्दगी जब मायूस होती है तभी महसूस होती है...

#रोमिल

Friday, February 3, 2012

पाँव छुकर घर से निकालो तो हर शुभ कार्य हो जाता है

पाँव छुकर घर से निकालो तो हर शुभ कार्य हो जाता है
माँ का आशीर्वाद मिले तो जीवन सफल हो जाता है.

सुख-दुःख के मृत्युलोक में इंसान फँस के रह जाता है 
रोमिल, माँ का साथ मिले तो जीवन तर जाता है.

#रोमिल

मुमकिन है मेरी बात से किसी को पहुँची हो ठेस

मुमकिन है मेरी बात से किसी को पहुँची हो ठेस
मगर मैंने आज तक कभी किसी को धोखा नहीं दिया.

#रोमिल

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान...

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान
कभी कृष्ण तो कभी राम बनकर, पुत्र बना भगवान.

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान... 

उसकी ममता में आंगन-आंगन खेला
कभी माखनचोर तो कभी ठुमक - ठुमक चलत भगवान.

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान...

माँ के हाथों से भोजन किया, अमृतजल पिया 
कभी मुख में सौरमंडल दिखाए भगवान. 

प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान...

संग - संग, खेल खेले, पीछे- पीछे दौड़ाए 
कभी आशीष पाए, कभी चरण कमल दबाये भगवान

रोमिल प्रभु ने भी माँ का सदा किया गुणगान...

#रोमिल

Thursday, February 2, 2012

माँ जब याद तुम्हारी आती है...

माँ जब याद तुम्हारी आती है, आँखों से नीर बह जाती है
व्याकुल मन तुझे पुकारता है, चारों ओर उदासी छा जाती है.
माँ जब याद तुम्हारी आती है...

बैठा रह जाता हूँ चौखट पे, सारी रैन बीत जाती है.
सारी सुधि बुद्धि पल भर में खो हो जाती है.
माँ जब याद तुम्हारी आती है...
करुणा से भरे शब्द मुख से निकलते है
आँखें मंदिर की ओर खीची चली जाती है
माँ जब याद तुम्हारी आती है...

फूलमाला से लिपटी जब तस्वीर तुम्हारी देखता हूँ
आत्मा से एक चीख-पुकार निकल आती है.
माँ जब याद तुम्हारी आती है...

माँ जब याद तुम्हारी आती है, आँखों से नीर बह जाती है
व्याकुल मन तुझे पुकारता है, चारों ओर उदासी छा जाती है.
माँ जब याद तुम्हारी आती है...

#रोमिल

Wednesday, February 1, 2012

रोमिल बचपन के दिन याद आते हैं...

"रोमिल" बचपन के दिन याद आते हैं...
जब माँ, अपने हाथों से उपले थपा करती थी...
धूप में उसे सुखाती थी...
~~~~~
अक्सर खाने के समय
मेरा दोस्तों के साथ खेलने चले जाना
माँ, का फिर पीछे
डंडी लेकर दौड़ते हुए आना
वोह जोर से चिल्ला कर कहना...
"कमीने, मरजाने" रोटी तो खा ले, फिर खेलते-मरते रहना"
"रोमिल" बचपन के दिन याद आते हैं...
~~~~~
सूरज रोज़ सुबह हँसते-खेलते हमारे घर आ जाता था
मैं चारपाई पर चादर ओढ़कर सोया-लेटा रहता था
माँ का सर पर हाथ फेरकर मुझे उठाना
वोह प्यार से कहना...
"सूरज-घर आया हैं
सूरज-घर आया हैं
देखो कितनी रोशनी
देखो कितनी खुशियाँ लाया हैं
सूरज-घर आया हैं
सूरज-घर आया हैं"
"रोमिल" बचपन के दिन याद आते हैं...
~~~~~
रात को जब आँगन में चूल्हा जला करता था
हम सब ज़मीन पर चूल्हा घेरकर रोटी खाते थे
माँ का प्यार से नंगे-नंगे पैरों में
गरम चिमटा मुझे लगाना
और डाँटते हुए कहना...
"दिन भर नंगे-नंगे पाओं घूमते रहते हो
इन पैरों को जला दूंगी"
"रोमिल" बचपन के दिन याद आते हैं...

#रोमिल

पिछले तीस सालों से तुझसे प्यार पाया था

पिछले तीस सालों से तुझसे प्यार पाया था
मैंने अपने जीवन में अदभूत खुशियों का संसार पाया था.

सीखा था तुझसे दुःख के पहाड़ पर, सुख के कमल खिलाना
मैंने ज़िन्दगी की डोर का अजब सा झूला पाया था.

पल-पल आँखों में सजते स्वपन प्यारे थे
मैंने आंधियों में भी दीपक जलने का हुनर पाया था.

तुझ पर फूल चढ़ाएँ माँ या खुद निछावर हो जाएँ    
मैंने तुझसे जीवन का अनमोल खज़ाना पाया था.

पिछले तीस सालों से माँ तुझसे प्यार पाया था.
रोमिल ने अपने जीवन में अदभूत खुशियों का संसार पाया था.

#रोमिल