Friday, February 10, 2012

माँ मेरे सर पर हाथ रख दो

माँ मेरे सर पर हाथ रख दो, 
मैं कामयाबी को पा लूँगा.

 डांट के ही सही मुझे सुला दो माँ 
मैं दो घड़ी नींद को पा लूँगा.

एक बार मेरा हाथ थामो माँ
मैं मंजिल को पा लूँगा.

देखो मैं ज़िन्दगी के रास्ते में कितना अकेला, तन्हा हूँ
एक बार ही सही मेरे हाथों में अपना हाथ दो माँ... 

#रोमिल

Thursday, February 9, 2012

ऊन के गोले में छोटे-छोटे सपने बुनती माँ

ऊन के गोले में छोटे-छोटे सपने बुनती माँ
तेरे आने की घड़ियों में कभी सोती, कभी जागती माँ.

खिलौनों को सजेती, कभी खुद खिलौना बन जाती माँ
कभी काजल का टीका लगाती, कभी नज़र उतारती माँ.

कीवाड़ पर तेरी राह देखती, तेरी चिंता में न सोये माँ
कभी जबरदस्ती तो कभी कहानी-लोरी गाकर सुलाए माँ.

कभी डांटे, कभी लाड-दुलार दिखाए माँ
रोमिल, बच्चे से चाहे जितनी भी दूर हो, फिर भी दिल में रहती माँ.

#रोमिल

Wednesday, February 8, 2012

मुझे तो रब, माँ में मिला.

न मक्का, न काशी में मिला
मुझे तो रब, माँ में मिला.

न दुनिया के किसी कोने में मिला
मुझे सुकून - चैन माँ की गोद में मिला.

हर जगह ढूंढी दो पल की ख़ुशी
मुझे ख़ुशी का पिटारा माँ में मिला.

हर किसी को परख के देखा दुनिया में रोमिल
मुझे मेरा अपना सिर्फ माँ में मिला.

#रोमिल

Monday, February 6, 2012

माँ केवल माँ नहीं प्रेम का सागर है.

कितना गहरा इसमें प्यार समाया
मेरे जीवन का संसार समाया
भक्ति, आदर्श, संसार का गागर है
माँ केवल माँ नहीं प्रेम का सागर है.

माँ ने ही जीवन दिया
माँ ने ही जीवन सवारा है
पल पल हर पल साथ दिया
हर कष्ट से माँ ने ही उभारा है

भूख, प्यास सब सह लेती है
बच्चों की अभिलाषा के लिए व्रत रख लेती है
जग बदला यह सारा है
माँ का प्यार वही अनोखा, निराला है.

ब्रह्मा की सबसे महान रचना है
सृष्टि में माँ जैसा न कोई दूजा है
अपने बच्चों की पीड़ा पल भर में हर लेती है
माँ, बच्चों की ख़ुशी के लिए सुख-चैन त्याग देती है.

कितना गहरा इसमें प्यार समाया
मेरे जीवन का संसार समाया
भक्ति, आदर्श, संसार का गागर है
रोमिल, माँ केवल माँ नहीं प्रेम का सागर है.

#रोमिल

Sunday, February 5, 2012

आँखों में छोटे - छोटे सपने सजा देती थी

आँखों में छोटे - छोटे सपने सजा देती थी
नींद नहीं आती थी तो माँ लोरी सुना देती थी.

कभी कहानियाँ सुनाती तो कभी चित्र बनाती थी
जब अंग्रेजी, गणित भाषा समझ ना आये तो माँ बड़े प्यार से समझाती थी.

जब बत्ती चली जाती थी तो माँ मोमबत्ती जला साथ बैठती थी
कभी टीवी पर साथ बैठा रंगोली, रामायण, महाभारत दिखाती थी.

जब छोटा था मैं रोमिल... मेरा हाथ कभी नहीं छोड़ती थी
अपनी गोद में बैठा मुझे झूला झुलाती थी.

जीवन की भाग दौड़ में माँ हमेशा साथ रहती थी
पल भर में हँसाती थी, सरे दुःख-दर्द भुला देती थी.

आँखों में छोटे - छोटे सपने सजा देती थी
नींद नहीं आती थी तो माँ लोरी सुना देती थी.

#रोमिल

Saturday, February 4, 2012

फरिश्तों का काम होता है.

दूसरों को ख़ुशी देना, 
फरिश्तों का काम होता है.

अपने दुःख की परवाह न करते हुए, 
दूसरों को सुख देना, 
फरिश्तों का काम होता है. 

अपने जीवन की परवाह किये बिना, 
दूसरों को जीवन देना, 
फरिश्तों का काम होता है. 

रब की बंदगी करना, 
उसके सजदे में सदा रहना, 
उस पर भरोसा रखना, 
फरिश्तों का काम होता है. 

हमेशा ईमानदार रहना,
सदा सच बोलना, 
सदा सबका भला सोचना, भला करना,
सबसे अच्छाई का व्यवहार करना,
फरिश्तों का काम होता है. 

रोमिल, मेरी माँ भी ऐसी थी...

#रोमिल

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है
भूली-बिसरी बचपन की यादें आँखों के सामने आ जाती है.

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

मन व्याकुल होकर उसे तलाशा करता है
घर के कोने में ना जाने कहाँ ख़ुशी छुप जाती है.

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

आँखें पथरा के रसोई घर की तरफ निहारा करती है
जब कानों में गूंजती हुई उसकी आवाज़ आ जाती है.

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

जो मेरे लिए अरदास करती थी आज मन उसके लिए अरदास करता है
जब रोमिल, माँ भगवान जी के घर चली जाती है...

बड़े उदास मन से जब माँ याद आती है...

#रोमिल