Sunday, March 4, 2012

चीनी है?

माँ एक टाइम पास सुनो...

रोमिल - चीनी  है? 
पड़ोसन - दरवाज़े पर रुको पांच मिनट.
यह लो आधी कटोरी चीनी है.
 
रोमिल - नहीं मुझे चीनी नहीं चाहिए.  
पड़ोसन - मगर तुम ही तो पूछ रहे थे? 
 
 रोमिल - वोह पडोसी होने के नाते इतना तो फ़र्ज़ बनता है कि पूछ ले कि कहीं पडोसी के यहाँ कुछ कमी तो नहीं है.   

हा हा

Saturday, March 3, 2012

गोबर से जब माँ आंगन को लीपा करती थी

गोबर से जब माँ आंगन को लीपा करती थी...
मुख से जपुजी साहिब, सुखमनी साहिब, गुरबानी वचन जब बोला करती थी.

खड़ाऊ, रसोई घर के बाहर ही रखती थी
चूल्हा जलाने से पहले वंदना किया करती थी.

जाड़े में नहलाकर चटाई पर धूप सिखवाती थी
माथे पर चन्दन का टिका लगाती थी.

रोमिल, माँ जब मेरे पास होती थी
मेरी हर प्रभात शुभ होती थी.

#रोमिल

aa jao kyunki yeh long distance relationship chalta hi nahi hai.

aa jao kyunki yeh long distance relationship chalta hi nahi hai.

आ जाओ क्योंकि यह लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप चलता ही नही है...

#Romil
#रोमिल

Friday, March 2, 2012

कभी - कभी यूं भी होता है

कभी - कभी यूं भी होता है
साथ मीलों तक बस खाली रास्ता चलता है.

दिन भर करता है भजनों से शिव का श्रृंगार
मन उसके दर्शन को तड़पता है.

चोट खाकर उसने तोडा है दर्पण
यह बात क्यों नहीं चेहरा देखने वाला समझता है.

हर छलकते आंसू को करता है प्यार 
रोमिल, हर छलकते आंसू को करता है प्यार 
हर बूँद में उसे माँ का चेहरा दिखता है...

#रोमिल

माँ तेरे लिए लाया हूँ

माँ तेरे लिए लाया हूँ...

कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ फूल और कुछ मोमबत्तियां
बड़े सरेज के रखे थे दु:खभरी ज़िन्दगी में
कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ फूल और कुछ मोमबत्तियां.

अपनी उँगलियों से पकड़कर तुझे साथ चलाना चाहता था
भाग दौड़ से भरी ज़िन्दगी में तुझे अपनी गोद में आराम कराना चाहता था
मेरा संगीत जगाता तुझे
मीठी लय से तुझे सुलाना चाहता था
माँ तेरे लिए लाया हूँ
कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ फूल और कुछ मोमबत्तियां.

मधुर बच्चों सी हंसी तेरे होंठो पर चाहता था
माथे पर तेरे चाँद चाहता था
तारों की तरह हमेशा तेरे चारों तरफ रहना चाहता था
तेरे सारे जीवन का भार उतार देना चाहता था
माँ तेरे लिए लाया हूँ
कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ फूल और कुछ मोमबत्तियां.

#रोमिल

Thursday, March 1, 2012

नज़र आती है...

बढ़ती उम्र में यह बात समझ आती है
किसी के चहरे पर इंतज़ार की घड़ियाँ नज़र आती है...

धुंधली सी एक दूर परछाई सी नज़र आती है
खामोश उदास सी मोड़ पर खड़ी हुई है
अपने बच्चों से बिछड़ी माँ नज़र आती है...

छुप - छुप के निहारा करती
उसकी हज़ार इच्छाएं नज़र आती है
ढेर सारी आँखों में संजोये सपनों की बारात नज़र आती है...

मृत्युं के बाद भी इंसान किस तरह तरफ्ता है
रोमिल मृत्युं के बाद भी इंसान किस तरह तड़पता है 
उसकी बेबसी की कहानी नज़र आती है...

#रोमिल

माँ होती है बच्चों के लिए विद्या की खान.

विद्या का देती है खुला दान
कंठ में वाणी भर सिखाती है अमृतबान
शब्दों की रचना, अर्थ की पहचान
भाव, रूप, छंद, वेदों का ज्ञान
माँ होती है बच्चों के लिए विद्या की खान. 
रोमिल माँ होती है बच्चों के लिए विद्या की खान.

#रोमिल
***
पढ़ाती है मन से
हाथ की उंगलियाँ पकड़ कर करती है जतन
कभी संग गुनगुनाती है
कभी चित्र बनाती है
कभी लोक व्यवहार सिखाती है
कभी व्यायाम 
तो 
कभी कमरे को शिक्षा के संदेशों से सजाती है
माँ जब बच्चों को पढ़ाती है.
रोमिल माँ जब बच्चों को पढ़ाती है.

#रोमिल