Monday, March 5, 2012

होली के मौसम में जब लोग होली खेला करते हैं

होली के मौसम में जब लोग होली खेला करते हैं
हम छत पर अकेले बैठे तुमको याद किया करते हैं...
~~~
पानी से जब लोग, एक - दूसरे को भिगोया करते हैं
हम आंसूओं से खुद को भीगो लिया करते हैं...
~~~
रंगों से जब लोग चेहरे को रंग देते हैं
हम रंगों में तेरी तस्वीर ढूंढा करते हैं...
~~~
जब शाम होती हैं
चाँद भी तन्हा अकेला होता हैं
हम छुपे-छुपे से छत पर बैठे 
चाँद संग होली खेला करते हैं...
~~~
होली के मौसम में जब लोग होली खेला करते हैं
रोमिल हम छत पर अकेले बैठे तुमको याद किया करते हैं...

#रोमिल

सोच रहा हूँ इस बार होली कुछ इस तरह मनाऊँ...

ये मेरी राधा...
ओह राधा
सुनो न राधा...

एक संगेमरमर की मूर्ति तेरी बनाऊँ
उसे लाल, गुलाबी, पीले, नीले, हरे रंगों से सजाऊँ
सोच रहा हूँ इस बार होली कुछ इस तरह मनाऊँ...

सफ़ेद रंग का सलवार कुर्ता
सफ़ेद रंग की तुझे चुनरी पहनाऊँ
लाल रंग की तुझे मारू पिचकारी
गुलाबी रंग का गुलाल लगाऊँ
सोच रहा हूँ इस बार होली कुछ इस तरह मनाऊँ...

तेरे स्वागत में घर के दरवाजे पर रंगोली सजाऊँ
तुझ पर फूलों की वर्षा करवाऊँ
अपनी हाथों से तुझे गुजिया खिलाऊँ
रोमिल की तुझे अर्धांगिनी बनाऊँ
सोच रहा हूँ इस बार होली कुछ इस तरह मनाऊँ...

#रोमिल

Sunday, March 4, 2012

FATEHPUR SIKRI - AGRA AND TAJ MAHAL - AGRA









FATEHPUR SIKRI - AGRA AND TAJ MAHAL - AGRA







FATEHPUR SIKRI - AGRA AND TAJ MAHAL - AGRA







FATEHPUR SIKRI - AGRA AND TAJ MAHAL - AGRA







माँ तुम आ जाओ

नयन से बहते हुए आंसू पुकार रहे है माँ तुम आ जाओ.
मौन के बंधन सब टूट के कह रहे है माँ तुम आ जाओ.
रखो मेरे पग के साथ अपने पग चलो कुछ दूर साथ चले, माँ तुम आ जाओ.
ममता से वंचित इस मन को फिर प्रफुल्लित कर जाओ, माँ तुम आ जाओ.
फिर पकड़ के खड़ा रहूँ आँचल तुम्हारा, माँ तुम आ जाओ.
ग़मगीन सिसकियों को मधुर मुस्कान में मिलाने, माँ तुम आ जाओ.
लौट आओ माँ
आशा का दीपक भुझ न जाये, ज्योति तुमको पुकार रही है, माँ तुम आ जाओ.

#रोमिल