Saturday, March 10, 2012

माँ तुम्हे क्या में अपनी आप बीती सुनाऊ

माँ तुम्हे क्या मैं अपनी आप बीती सुनाऊ
यह आंसू पल भर में आ जाते है.

मन विचलित सा रहता है
खुशियों के फूल पल भर में बिखर जाते है.

दिमाग में चलते-फिरते एक बेचैनी सी रहती है
सपने भी धुआं सा हो जाते है

जीवन में काम हजारों है
दौड़ धूप के बीच आराम के पल खो जाते है.

सब कुछ पास होते हुए भी 
यह हाथ खाली हाथ ही रह जाते है.

माँ तुम्हे क्या मैं अपनी आप बीती सुनाऊ
यह आंसू पल भर में आ जाते है.

#रोमिल

Friday, March 9, 2012

कोना-कोना

कल दिन भर,
रात भर देखता रहा घर के कमरे का कोना-कोना

तेरी तस्वीर पर माला लिपटी
धूल-मिट्टी से भरा हर कोना-कोना

सुनी सी छत
पसीजती दीवारें
खामोश हवा
अलग-थलक पड़ा बिस्तर की चादर का कोना-कोना.

बेहद नीरस, बेहद उदास, बेहद परेशां
दिखा यह मंज़र
जैसे तुझे रो-रोकर माँ पुकार रहा हो घर का कोना-कोना.

#रोमिल

Thursday, March 8, 2012

माँ तेरे लिए...

गेंदे-गुलाब की माला और फूल बरसता है,
माँ तेरे लिए अबीर-गुलाल बरसता है.

नैनो की ज्योति यह खुशियों का हुडदंग बरसता है,
माँ तेरे लिए जीवन का सुर-संगीत बरसता है.

जो कुछ मेरा है सब तुमको अर्पित,
माँ तेरे लिए यह सांसों का कण-कण बरसता है.

ग्रहण करो माँ रोमिल का प्रणाम इस त्यौहार में,
माँ तेरे लिए परंपरा का श्रृंगार बरसता है.

#रोमिल

Wednesday, March 7, 2012

बीत गया होली का त्यौहार.

बिस्तर पर चादर ओढ़े हम लेटे रहे 
बीत गया होली का त्यौहार.

न रंग खेला किसी से 
न लिखा कोई सदविचार. 
बीत गया होली का त्यौहार.

खिड़की, दरवाज़े पर पड़ा रहा पर्दा 
कभी टी.वी. देखा 
कभी एस.एम.एस. किया 
कभी पढ़ा अख़बार 
बीत गया होली का त्यौहार.

माँ को याद किया 
तस्वीर पर गुलाल का लगाया टीका 
फिर गुलाब-गेंदा की माला से किया माँ का श्रृंगार 
बीत गया होली का त्यौहार. 
रोमिल बीत गया होली का त्यौहार.

#रोमिल

Tuesday, March 6, 2012

धन्य - धन्य है मेरी माता जिसने मुझे इंसान बनाया

धन्य - धन्य है मेरी माता जिसने मुझे इंसान बनाया
अपने स्नेह, ममता, प्यार से मुझे जीने लायक बनाया
देकर ज्ञान की ज्योति, मन में विश्वास जगाया
देकर परिश्रम के पंख मुझे उड़ने योग बनाया.

धन्य - धन्य है मेरी माता...

#रोमिल

सुन्दर चहरे नहीं, सुन्दर काम करने वाले को चुने.

सूंदर चहरे नहीं, सुन्दर काम करने वाले को चुने.

Monday, March 5, 2012

माँ काश मैं बच्चा ही रहता

माँ काश मैं बच्चा ही रहता
तेरी गोद में ही सोता
तेरा आँचल पकड़ - पकड़ कर फिरता
कभी न तेरा साथ छोडता...

खिलौने से तू मुझे खिलाती
रोज़ सवेरे मुझे सुसज्जित करती
राजा - रानी की कहानी सुनाती
अपने कर कमलों से मुझसे भोजन कराती

माँ काश रोमिल बच्चा ही रहता
कभी ना तेरा साथ छोडता...

#रोमिल