Friday, April 6, 2012

आज समझ आया है माँ का होना

आज समझ आया है माँ का होना

कितना प्यार
कितनी ममता
बच्चों के लिए हर पल विचलित होना
आज समझ आया है माँ का होना...

यौवन का पल पल ढलना
सपनों का तिल-तिल मरना
नित नए घर के झमेलों में पड़ना
आज समझ आया है माँ का होना...

भविष्य में संजोना
शंकाओं में फस कर चुपके-चुपके रोना
बच्चों की ख़ुशी में प्रफुल्लित होता मन का कोना-कोना
आज समझ आया है माँ का होना...

सुबह जल्दी उठना
रात में देर से सोना
घड़ी के काटों पर डाले ज़िन्दगी का बिछौना
आज समझ आया है माँ का होना...

#रोमिल

Thursday, April 5, 2012

माँ की मुस्कान

माँ की मुस्कान

जैसे सुबह - सुबह प्रकृति का गान
जैसे वन में गूंजती मधुर तान
जैसे चिड़ियों का शोर
जैसे वन में नाचे मोर
जैसे नदी में गिरते झरने की आवाज़
जैसे बज रहा हो कोई साज
जैसे मंदिर में हो रही आरती
जैसे संग नाचे साथी
जैसे भरी दोपहर में पीपल की छाया
जैसे किसी बालक को भोजन कराती उसकी मैया.


हमेशा खिलखिलाती रही यह मुस्कान
हमेशा बजता रहे यह गान
कभी न दूर हो यह छैयां
हमेशा संग रहे मैया.

#रोमिल

Wednesday, April 4, 2012

घर के आंगन में माँ की कुर्सी नहीं दिखाई देती.

घर के छज्जे पर खड़ा मैं सोच रहा था 
यादों के मौसम से कुछ फूल मैं तोड़ रहा था...

घर के आंगन में माँ की कुर्सी नहीं दिखाई देती 
गुरबानी के शब्द  
न तो 
माँ की डांट अब सुनाई देती.

एक कमरे में कैसे सारी दुनिया समां जाती थी 
हँसते-हँसते पेट में मरोड़ पड़ जाती थी 
अब व्यंग-बाण सी बातें नहीं सुनाई देती 
घर के आंगन में माँ की कुर्सी नहीं दिखाई देती.

जन्मदिन पर खीर अब बनती नहीं
थाली से झूठन कोई समेटता नहीं
व्यंजन की तारीफ की बातें नहीं सुनाई देती 
घर के आंगन में माँ की कुर्सी नहीं दिखाई देती.

#रोमिल

Tuesday, April 3, 2012

माँ बच्चों से कितना प्यार करती है

माँ बच्चों से कितना प्यार करती है
अपना जीवन उन पर वार देती है.

वो हमेशा जला हुआ टोस्ट अपने लिए रख लेती है
मिठाई का सबसे छोटा टुकड़ा लेती है.

हर त्यौहार पर बच्चों के लिए ड्रेस लेती है
खुद पुरानी साडी में ही हर त्यौहार निकाल देती है.

मार्क्स के लिए स्कूल की टीचर से लड़ाई करती है
अपनी दवा का रूपया बच्चों की किताबों के लिए बचा के रखती है. 

सुबह सबसे पहले उठती है
और रात में सबसे देर में सोती है.

माँ बच्चों से कितना प्यार करती है
अपना जीवन उन पर वार देती है.

#रोमिल

Monday, April 2, 2012

दिन कब आयेंगे?

मेवे वाली खीर, सेवई, आइसक्रीम कुल्फी के दिन फिर कब आयेंगे
रब्बा जाने
माँ से मिलने के दिन कब आयेंगे?

घर के कारागार से कब होंगे हम आज़ाद
रब्बा जाने
आँगन में खेलने के दिन कब आयेंगे?

जलता रहेगा कब तक यह दिल नफरत की लू-लपेट में
रब्बा जाने
मोहब्बत में मुस्कुराने के दिन कब आयेंगे?

चलते जा रहा है कंधे पर ज़िन्दगी का भोझ रखकर वोह शख्स
रब्बा जाने
रास्तों में ठराव के दिन कब आयेंगे?

ना खुदा की चाहत
ना खुदा के पैगम्बर से मिलने की आरज़ू
ना जन्नत पाने की इच्छा
रब्बा जाने
यकीन, भरोसे के दिन कब आयेंगे?

दोस्ती का पैमाना लिए
ममता की ख्वाइश लिए
रब्बा जाने
दोस्त और माँ से मिलने के दिन कब आयेंगे?

#रोमिल

Sunday, April 1, 2012

सपने में देखा

सपने में देखा
मैं, समुन्दर के किनारे-किनारे अकेला चल रहा हूँ
रेत पर मेरे कदमो के निशान बनते जा रहे है
आसमान काला हो चला है
हवा सर्द हो चली है...

कुछ पलों के बाद मैंने देखा
सूरज किरणे फैलाये मेरी तरफ आ रहा है
और 
मैं, माँ के साथ समुन्दर के किनारे-किनारे चल रहा हूँ
मेरे हाथों को माँ ने अपने हाथों में जोर से पकड़ा हुआ है
रेत पर हम दोनों के कदमो के निशान बनते जा रहे है
आसमान सफ़ेद हो चला है.

माँ बोली
तू मेरा बहादुर बेटा है
काली रात को तूने अकेले ही तह कर लिया
अब मैं तेरे साथ हूँ और 
तेरी ज़िन्दगी में उजाला ही उजाला है.

#रोमिल

रोते हुए मासूम लड़के ने चाँद की तरफ

रोते हुए मासूम लड़के ने चाँद की तरफ देखा...

चाँद ने उससे पूछा 
इतना अच्छा सुहाना मौसम है 
हवा भी ठंडी - ठंडी चल रही है
सारा वातावरण खुशनुमा है
फिर ऐ लड़के तू क्यों रो रहा है?

लड़का बोला
तेरे में मुझको माँ का चेहरा नज़र आ रहा है
इतना दूर है वो
बस मैं चेहरे को छू नहीं पा रहा हूँ....

चाँद बोला
अपने दिल में सच्चाई से झाँक ज़रा
माँ का चेहरा वहीं नज़र आएगा.
सच्चे प्रेम में हर दूरी मिट जाती है 
बेटा जो बुलाये तो माँ दौड़ी चली आती है...

#रोमिल