यूं भी कुछ पल होंगे अपने...
-----------------
एक कॉफी
और सर्दी की रात
कम्बल में हो हम दोनों साथ
और बजे प्यार की गिटार
ओह मेरे यार...
ओह्ह्ह मेरे यार...
ओह्ह्ह मेरे यार...
*
एक छत्री
और बारिश हो लाजवाब
हाथो में पकड़े दोनों हाथ
साथ में बादल मारे जोर से किक
और बजे प्यार की गिटार
ओह मेरे यार...
ओह्ह्ह मेरे यार...
ओह्ह्ह मेरे यार...
*
एक आइसक्रीम
और चांदनी रात
बैंच पर बैठे हो हम दोनों पूरी रात
और बजे प्यार की गिटार
ओह मेरे यार...
ओह्ह्ह मेरे यार...
ओह्ह्ह मेरे यार...
*
एक साइकिल
और सुहानी शाम
पहाड़ों पर चलते रहे हम बस यूं ही यार
और बजे प्यार की गिटार
ओह मेरे यार...
ओह्ह्ह मेरे यार...
ओह्ह्ह मेरे यार...
#रोमिल
जबसे नज़रे चार तुमसे हो गई
ज़िन्दगी अपनी शब-ए-बहार हो गई
मुझसे न पूछो हाल-ए-दिल सनम
आपकी जान थी
आप पर कुर्बान हो गई...
जबसे नज़रे चार तुमसे हो गई
ज़िन्दगी अपनी शब-ए-बहार हो गई....
*
वैसे तो हम थे महफ़िल-ए-चिराग
आपके क़दम जो पड़े
महफ़िल थी मेरी
आपके नाम हो गई...
जबसे नज़रे चार तुमसे हो गई
ज़िन्दगी अपनी शब-ए-बहार हो गई....
*
मुझसे न करो त्यौहार की बातें यारों
ज़िक्र जब होता है उनका
अपनी तो ईद
अपनी दिवाली हो गई...
जबसे नज़रे चार तुमसे हो गई
ज़िन्दगी अपनी शब-ए-बहार हो गई...
*
दरिया-मांझी भी देखकर खुश हुआ
उसके पहलू में अपनी शामे हो गई...
जबसे नज़रे चार तुमसे हो गई
ज़िन्दगी अपनी शब-ए-बहार हो गई...
*
ज़ुल्म तकदीर का हम पर यूं हुआ
मुस्कुराते-मुस्कुराते वो बेवफा हो गई...
जबसे नज़रे चार तुमसे हो गई
ज़िन्दगी अपनी शब-ए-बहार हो गई...
*
रुख़सत-ए-सनम हमसे यूं हुई
शहर के हर एक मकान में जाकर पूछते है
जो मेरी थी वो किस की हो गई...
जबसे नज़रे चार तुमसे हो गई
ज़िन्दगी अपनी गुमनाम हो गई...
#रोमिल
७५ साल ज़िन्दगी के.... तुम्हारे साथ छु मंतर हो गए...
----------
इतने साल हो गए
अपने सर के बाल भी कम हो गए
मगर ऐसी कोई शाम नहीं ढली
जब तुम्हारे हाथ से बनी कॉफी की याद न आई हो...
-----------
मेरे आने का पता तुम्हे न जाने कैसे चल जाता था
जैसे ही बैग रखूँ
"कॉफी रेड्डी है हुजुर ए आला"
तुम्हारा यह खूबसूरत शब्द मेरे कानों तक पहुँच जाता था...
------------
न्यूज़ पेपर, मैगजीन तुम मुझे पढ़ने नहीं देती थी
बस मेरे ही दिनभर की बातें तुम मुझसे पूछा करती थी...
सच कहूँ तो...
तुम्हारे हाथो के बने पकौड़ों,
इमली की चटनी के साथ
लाजवाब होते थे...
पता नहीं तुम कैसे ५ मिनट में बना लाती थी...
------------
वो शाम भुलाये नही भूले जाती है
ज़िन्दगी के ७५ साल में भी याद आती है
तेरे हाथों से बनी कॉफी की याद आती है...
#रोमिल
मेरी दुआ
मेरी वफ़ा साथ ले जा...
ओह्ह्ह जाने वाले
आखिरी सलाम ले जा...
*
सफ़र में तुझे मिलेंगे हजारो दीवाने
कोई न फिर तुझे मेरे जैसा मिले
मेरी तस्वीर ले जा...
मेरी दुआ
मेरी वफ़ा साथ ले जा
ओह्ह्ह जाने वाले
आखिरी सलाम ले जा...
*
यही होगा मेरे लिए तेरा करम, मेरी जान
मेरे ख़त जो तू अपने साथ ले जा...
मेरी दुआ
मेरी वफ़ा साथ ले जा
ओह्ह्ह जाने वाले
आखिरी सलाम ले जा...
*
नादान बड़े हैं ज़माने वाले
जो सोचते हैं हम, तेरे बिना जी लेंगे
जाते-जाते तू मेरी मौत की खबर साथ ले जा...
मेरी दुआ
मेरी वफ़ा साथ ले जा
ओह्ह्ह जाने वाले
आखिरी सलाम ले जा...
#रोमिल
उसके ख़त हैं या जन्नत मेरी
उसके ख़त हैं या जन्नत मेरी
गुपचुप रहते हैं
फिर पूछा करते हैं खैरियत मेरी...
उसके ख़त हैं या जन्नत मेरी
*
ख़ामोशी को मेरी पल भर में समझ जाते हैं
गम में मेरी रोते हैं
ख़ुशी में मेरी मुस्कुराते हैं
समझते हैं हर इल्तिजा मेरी...
उसके ख़त हैं या जन्नत मेरी
*
तलाश-ए-यार में छोड़ी थी ज़मीन हमनेना सर पर आसमान था ना साथ अपने
हर पल साथ देते हैं नादान मेरी
उसके ख़त हैं या जन्नत मेरी
*
ज़माने ने सितम लाख किये हैं मुझपे
हँसे हैं
मुस्कुराये हैं मुझपे
दागे हैं बदनामी के लाख निशान मुझपे
करते हैं यह मोहब्बत की हिफाज़त मेरी...
उसके ख़त हैं या जन्नत मेरी
गुपचुप रहते हैं
फिर पुछा करते हैं खेरियत मेरी...
उसके ख़त हैं या जन्नत मेरी...
#रोमिल
ज़िन्दगी की जो बोतल हैं
बड़ी रंगीन
बड़ी खूबसूरत हैं
ज़िन्दगी की जो बोतल हैं...
*
बड़े अंदाज़ से पी हैं
थोड़ी मीठी
थोड़ी कड़वी हैं
ज़िन्दगी की जो बोतल हैं...
*
बहुत सी यादें भरी है
ख़्वाब समेठे पड़ी है
ज़िन्दगी की जो बोतल हैं...
*
कभी रूठकर ना खाना, खाना तुम्हारा
कभी अपने हाथो से तुमको खाना खिलाना हमारा
----
कभी तकिया संग लड़ना तुम्हारा
कभी तेरी गोद में सोना हमारा
----
कभी मेरी सेविंग करना तुम्हारा
कभी तुझको चूड़ी, पायल पहनाना हमारा
----
कभी माँ के संग हँसना तुम्हारा
कभी माँ की डाँट सुनकर रोना तुम्हारा
---ना जाने ऐसे कितने किस्से कहानी लपेटे हुए है
ज़िन्दगी की जो बोतल हैं...
बड़ी रंगीन
बड़ी खूबसूरत हैं
ज़िन्दगी की जो बोतल हैं...
#रोमिल