Friday, October 15, 2010

मेरे सपने मेरी नींदों में उड़े.

चिराग जले और धुंआ उड़े   
मेरी बर्बादी के किस्से कहाँ - कहाँ उड़े.
*
खुदा न जाने कैसा  मौसम उमड़ कर आया हैं
इन गर्दिशों में न जाने कितने झोपड़े उड़े.
*
बस एक कशमकश और मैं बेबस
वोह किसी की बाहों में दिखे तो मेरे होश उड़े...
*
टूटा इस तरह मेरा गुरूर  
मेरे सपने मेरी नींदों में उड़े.  
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