मौसम हैं मोहब्बत का कही जाओ न फिसल...
सनम ज़रा अहिस्ता - अहिस्ता रखा करो कदम
*
गैर की महफ़िल में न जाओ
यूं न मुझको तड़पाओ...
कभी तो रखो इस गरीब के घर में भी क़दम
सनम ज़रा अहिस्ता - अहिस्ता रखा करो कदम
*
चमन में चलो तो ज़रा देखकर चलो
यही कोई दफ़न कर गया हैं मुझे...
कहीं मेरे दिल पर न रख दो तुम अपने क़दम
सनम ज़रा अहिस्ता - अहिस्ता रखा करो कदम
*
कभी तो मिले तेरे मेरे हाथ
हो अपना साथ एक दूसरे के वास्ते...
कभी तो तुम रखो मेरे क़दम के साथ अपने क़दम
सनम ज़रा अहिस्ता - अहिस्ता रखा करो कदम
मौसम हैं मोहब्बत का कही जाओ न फिसल...
सनम ज़रा अहिस्ता - अहिस्ता रखा करो कदम
#रोमिल
No comments:
Post a Comment