घर नहीं
यह कब्र तो अपने महबूब के नाम कर जाते हैं...
*
दीये की तरह जलता रहा उम्र भर
जब सवेरा हुआ तो सोचा की अब भुझ जाते है...
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मुस्कुराया इतना की सब उसकी मुस्कराहट के कायल हो गए
जाते-जाते सोचा की साथ आँखों में आंसू दे जाते है...
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क्या नहीं था उसके पास इस जहाँ में
दोस्त था
प्यार था
ऐशो आराम था
बस एक रब नहीं था
सोचा की चलो उससे मिलने जाते है...
#रोमिल
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