Saturday, April 23, 2011

बहुत छोटी सी बात हैं दोस्त के एहसानों के सामने...

एक टूटा हुआ घर हैं दुनिया मेरे सामने 
रब भी कुछ नहीं हैं मेरी दोस्ती के सामने...
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कहने को तो सबने चहरे पर चहरे लगा रखे हैं 
मगर सारे नकाब उतर जाते हैं मेरे सामने...
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कौन खरीद सकता हैं मुझसे मेरी दोस्ती 
यह दौलत भी मिट्टी हैं मेरे सामने...
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चाहत तो इतनी हैं आसमान में दोस्त का नाम लिख दूं रोमिल  
मगर कुछ नहीं कर पाया अपनी मजबूरियों के सामने...
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ऐसी सौ ज़िन्दगी लूटा सकता हूँ दोस्त के लिए रोमिल  
बहुत छोटी सी बात हैं दोस्त के एहसानों के सामने...

#रोमिल

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