Friday, October 29, 2010

इंसान खुद को खुदा समझता हैं...

मुहब्बत में खुमार यूं चढ़ता हैं... 
इंसान खुद को खुदा समझता हैं...
मत करो उससे ईमान की बात यारों
जो महबूब के सजदे में सर झुकाए रहता हैं...
मुहब्बत में खुमार यूं चढ़ता हैं...

"लोग न जाने क्या क्या बातें करते हैं
उसके क़दम तो खुद-बा-खुद इबादत के लिए चलते हैं..."

क्या करना उससे शिकवा, क्या बातें यारों
जो ऊपर-ऊपर हँसता हैं, अन्दर-अन्दर रोता हैं... 
साहिल पर रहने वाले आखिर क्या जाने
तूफानों में कौन डूबता हैं, कौन उभरता हैं...

मुहब्बत में खुमार यूं चढ़ता हैं... 
इंसान खुद को खुदा समझता हैं... 

होश में ऐसा आये तोह यह कैसा आये
जो दूसरों का हाल देखकर भी नहीं संभलता हैं...
बेवफाई पर भी दुआ हाथ के लिए उठ जाये
मुहब्बत में खुमार यूं चढ़ता हैं...
इंसान खुद को खुदा समझता हैं... 
इंसान खुद को खुदा समझता हैं...

#रोमिल

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