तू इतने दिल के करीब रहती हैं
फिर भी करीब नहीं रहती...
*
हम चिरागों को जलाते रहते हैं, भुजाते रहते हैं रात भर
इतनी लम्बी रात हैं
की सुबह साथ नहीं रहती...
*
इस क़दर आसान ना होगा तेरे साथ दोस्ती का सफ़र
तू मेरी दोस्त हैं
फिर भी अपने बीच दोस्ती नहीं रहती...
*
बस कुछ दिन और बिताऊँ फिर चला जाऊँगा इस शहर से
मोहब्बत तो हैं तुझसे
मगर इबादत साथ नहीं रहती...
#रोमिल
No comments:
Post a Comment