Monday, February 20, 2012

शिवलिंग इस सिंगार से तुम मर न गए हो!

भक्त भी कितने अजीब हैं तुम्हारे
देखो कितना स्नेह दिखाते हैं.
*
बेल पत्र से धक तुमको देते हैं
तुमको जल, दूध, घी, शहद, दही से नहलाते हैं
फूलों की माला, भभूति-राख से तुम्हारा सिंगार करते हैं
बार-बार अपने सर-हाथों का स्पर्श तुम पर करते हैं.
*
यह सब देखकर मैं डर जाता हूँ
घबराने सा लगता हूँ
यह सोचने लगता हूँ
काश तुम रोमिल आवाज़ देकर इतना बता देते की तुम जिंदा हो
वरना मैं समझूंगा शिवलिंग इस सिंगार से तुम मर न गए हो!

[Inspired]

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