Saturday, January 15, 2011

उफ़... वो बरसाती रात

उफ़... वो बरसाती रात
अकेले कमरे में दो बदन एक साथ

हवा थी जोरो पर
चारों ओर दूर तक सन्नाटा साथ

बिजली कड़कती हुई
पत्ते फडफडाते हुए
खुलती-बंद होती खिड़की का साथ

अँधेरे का फैलना
बादलों का छा जाना 
बिजली का गुप हो जाना
जलती हुई मोमबत्ती का साथ

उफ़... वो बरसाती रात
अकेले कमरे में दो बदन एक साथ...

#रोमिल

Thursday, January 13, 2011

लोग कहते थे की मैं गिर जाऊँगा...

लोग कहते थे की मैं गिर जाऊँगा
मगर मुझे तेरे ग़म ने संभाल रखा हैं...
आइना टूटा हैं मगर
सोने में जड़ा रखा हैं...
*
फिर कही मुलाक़ात होगी तेरी-मेरी
इसी हसरत को दिल में जगा रखा हैं...
*
ढूँढ़ पाए न कोई तेरी तस्वीर को
इसलिए मैंने इसे अपने दिल में छुपा रखा हैं...
*
तेरी आँखों में आँसू देखूँ तो भिड़ जाऊँ मैं खुदा से भी बच्चे की तरह  - २
तू खुश रहे हमेशा
बस यही खुदा से अरमान रखा हैं...

#रोमिल

Wednesday, January 12, 2011

लोहड़ी ओह लोहड़ी

लोहड़ी ओह लोहड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
बना लो रे जोड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
*
सोहनी सोहनी कुड़ी ने छेड़ी चुप्पी चुप्पी गल्लाँ
मैं नहीं मुंडे की रानी बनना   
सखी-सहेलीआं को नहीं छडना
रे चल गई मुंडिया के दिल पर कटारी
लोहड़ी ओह लोहड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
बना लो रे जोड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
*
मुंडे ने भी बाँह ऊंची करना
मुछो पर हाथ फेर कर कहना    
ज़माने से नहीं डरना
तेरा पीछा नहीं छडना  
अरे तुझे ही अपनी रानी बनाना
रे छड के बाह कुड़ी बागी  
लोहड़ी ओह लोहड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
बना लो रे जोड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी

#रोमिल

Tuesday, January 11, 2011

यह ख़्वाब बहुत मुश्किल हैं....मगर अच्छा हैं...

वो चाहे जितनी भी आँखों से ओझल रहे रोमिल बाबू
मगर उसका ख़्वाबों-ए-ख्याल अच्छा हैं...
*
चाहे कितने भी दुःख हमसे लिपटे रहे
उसका दामन रहे खुशियों से भरा उम्र भर रोमिल बाबू
अपने लिए बस यही अच्छा हैं...
*
और सितम मत करो अपने दिल पर रोमिल बाबू 
इसको रखो हसीनो से दूर
आपके लिए यही अच्छा हैं...
*
वो पूछते रहते हैं मरीजों का हाल
हमको एक नज़र देखते भी नहीं... २ 
एक हम मर रहे हैं जीते जी रोमिल बाबू
उनका यह कातिल-ए-अंदाज़ अच्छा हैं...
*
ख़्वाब हैं कि अपनी कब्र भी उनकी कब्र के साथ बने रोमिल बाबू 
यह ख़्वाब बहुत मुश्किल हैं
मगर अच्छा हैं...

#रोमिल

Monday, January 10, 2011

आपकी क़सम

कोई आपसा दीवाना मिले
ढूँढ रहे हैं हम 
आपकी क़सम
*
गली-गली ढूँढा उसे पर उससे मिल ना सके हम
आपकी क़सम
*
वो खूबसूरत आवाज़
वो शौक़-ए-मुस्कान
कही इसी आरज़ू में मर ना जाये हम...
आपकी क़सम 
*
जब तक ना पाएंगे उसे
यूँही सफ़र में रहेंगे हम 
आपकी क़सम

#रोमिल

Saturday, January 8, 2011

यह हिंद के शेर हैं...


कपकपाती हुई ठण्ड में भी डटे रहते हैं
बर्फ के मैदानों में भी मोर्चा संभाले रहते हैं 
यह हिंद के शेर हैं
हिंद की रक्षा करते हैं...
*
न यह धुंध, कोहरे से डरते नहीं  
बरसात, ओले में भी आगे बढते रहते हैं
चमकती हुए बिजली में भी चमकते रहते हैं 
यह हिंद के शेर हैं
हिंद की रक्षा करते हैं...
*
न बर्फीला मौसम इनको हारा पाता हैं
न गरजता बादल इनको डरा पाता हैं
दुश्मन भी देखकर इनका हौसला पीछे भाग जाता हैं
यह हिंद के शेर हैं
हिंद की रक्षा करते हैं...
*
हर भारतीय इन पर गर्व करता हैं
गर्व से यह कहता हैं
यह हिंद के शेर हैं
हिंद की रक्षा करते हैं...

#रोमिल

चलो लुफ्त सर्दियों के उठाते हैं

चलो लुफ्त सर्दियों के उठाते हैं
हल्के-हल्के गिरती हुई ओस में कहीं बाहर हम दोनों आइसक्रीम खाने जाते हैं...
हरी भीगी हुई घास पर नंगे पैर दूर तक चलते हैं...

और

किसी सड़क की दुकान पर खड़े होकर गरमा-गर्म गाजर के हलवे का मज़ा लेते हैं...
यही पास की दुकान में सुना हैं
केसरी दूध, कुल्हड़ में मिलता हैं
उसमें मखाने डालकर खाते हैं...
चलो लुफ्त सर्दिओं के उठाते हैं

#रोमिल