खून-ए-दिल पियूं कब तक
जो ना कभी आया था
जो ना कभी आने वाला हैं...
*
वादे सब झूठे थे
बातें सब थी झूठी
कैसा शिकवा उससे
जो ना कभी आया था
जो ना कभी आने वाला हैं...
*
एक दीदार को तरसे नैना
दरवाज़े को तकते नैना
झिलमिल झिलमिल बरसे नैना
कैसा इंतज़ार उसका
जो ना कभी आया था
जो ना कभी आने वाला हैं...
*
बीते वर्षो,
बीती सदियाँ
बीते दिन रात रे अपने
कैसा पछतावा करना
जो ना कभी आया था
जो ना कभी आने वाला हैं...
#रोमिल
No comments:
Post a Comment