Monday, January 31, 2011

बड़ा अजीब हुआ करता हैं..

बड़ा अजीब हुआ करता हैं...
*
कतरा कतरा सच बोलता हैं
समुन्दर चुप रहता हैं...
*
चाहत तो मदीने की हुआ करती हैं
मगर इंसान, शैतान की तरफ बढता रहता हैं...
*
वैसे तो खुदा, तेरी दुनिया बहुत बड़ी हैं - २
मगर ना जाने क्यों ख़्वाबों से कम हुआ करती हैं...
*
लोग, बेवफाई तो खुद करते हैं
फिर ना जाने क्यों तमन्ना वफ़ा की रखते हैं...
पराये क्या अपनों से डर लगता हैं
काँटों से नहीं फूलों से डर लगता हैं...

#रोमिल

Wednesday, January 26, 2011

जाने क्या होगा इस लुड्की का

मेरे रब्बा
जाने क्या होगा इस लुड्की का
सोफा पर लेटकर खाना खाती हैं
टीवी सीरियल को देखकर रोती हैं
अपनी टी-शर्ट से नाक यह पोछती हैं
लुडके से खामखा यह लड़ती हैं
मेरे रब्बा
मेहर करना 
जाने क्या होगा इस लुड्की का...

#रोमिल

Tuesday, January 25, 2011

दिल की आरज़ू हैं की परिंदा बन जाऊं

दिल की आरज़ू हैं की परिंदा बन जाऊं
कभी तेरे शहर में भी आऊँ
तेरे घर की छत पर बैठ के 
कभी तेरे हाथों से दाना खाऊँ...
*
चांदनी रातों में तुझे सोते हुए देखूं
सूरज की पहली किरन के साथ जागते हुए देखूं
तुझे कमरे में ठहलते हुए पाऊँ 
तेरे घर की खिड़की में बैठ के 
कभी तेरे हाथों से दाना खाऊँ...
दिल की आरज़ू हैं कि परिंदा बन जाऊं
कभी तेरे शहर में भी आऊँ...
*
यूंही किताबों के साथ लड़ते हुए देखूं
भगवान् को पूजते हुए देखूं
कुछ गुनगुनाते हुए पाऊँ 
तेरे घर के आँगन में बैठ के 
कभी तेरे हाथों से दाना खाऊँ...
दिल की आरज़ू हैं कि परिंदा बन जाऊं
कभी तेरे शहर में भी आऊँ...

#रोमिल

Monday, January 24, 2011

नगर की बस...

नगर की बस में भी अजीब खेल हुआ करते हैं    
छोटी-छोटी बात पर तमाशे हुआ करते हैं...
*
सीट देख ले खाली तो जानवरों की तरह लपकते हैं
दरवाज़े पर हेंगर की तरह लटके रहते हैं...
*
जवानों पर ज्यादा बुढ़ापा चढ़ गया हैं
वो खड़े नहीं हो सकते, इसलिए सीट पर ही बैठे रहते हैं...
बुड्ढे बेचारे अब भी जवान हैं
खड़े होकर सफ़र करते हैं...
*
महिलाओ के लिए सीट तो सरकार ने ख़ामख़ा आरक्षित कर रखी हैं
वहां पर अक्सर मर्द बैठा करते हैं...
*
बस में मूंगफली के छिलके, 
पान के धब्बे,
चाय के ग्लास जहाँ देखो दिखाई पड़ जाते हैं
ऐसा लगता हैं जैसे कूड़ा-घर में हम सफ़र करते हैं...

#रोमिल

Sunday, January 23, 2011

बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था

बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था 
किसी को चोट लगे तो रोने लगता था
गम में किसी को देख ले तो खुदा से लड़ने लगता था
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था 
***
बहुत प्यार था उसे परिंदों-जानवरों से
परिंदों को दाना दिया करता था
जानवरों को खाना दिया करता था 
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था...
***
मस्जिद की दीवार पर बैठकर राम को याद किया करता था
मंदिर में कुरान की बातें किया करता था
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था...
***
सज्जनों को बिखर जाने को कहता था
दुर्जनों को साथ रहने को कहता था
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था...
*
कोई उसे पत्थर मारे तो उसे आशीर्वाद दिया करता था
न किसी को पराया, न किसी को दुश्मन समझता था 
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था...

#रोमिल

Saturday, January 22, 2011

जब - जब मैं बेईमानी की गली से गुज़रा

जब - जब मैं बेईमानी की गली से गुज़रा
खुदा क़सम मैं तब - तब अपनी कब्र से गुज़रा...
*
न कोई गवाह था मेरे खिलाफ
न कोई सबूत था मेरे खिलाफ  
फिर भी सबने मुझे कातिल समझा
जब - जब मैं लाश के बगल से गुज़रा...
*
अब किस बात का जश्न मनाते हो, मेरे दुश्मनों
मैं तो सूली पर चढ़कर भी शहीद निकला...
*
जो फिरता हैं बनकर मसीहा
वो ही मेरी बर्बादी का गुनेहगार निकला...

#रोमिल

Friday, January 21, 2011

मैं तो ब्लॉग बनाना सीखूंगी....

Aaiya...

मैं तो ब्लॉग बनाना सीखूंगी
मैं तो ब्लॉग बनाना सीखूंगी
ट्विट्टर पर मैं सबको TWIT करना सीखूंगी
ब्लॉगर पर पोस्ट करना सीखूंगी
मैं तो ब्लॉग बनाना सीखूंगी - २
*
अमिताभ के ब्लॉग को मैं करुँगी फॉलो
शाहरुख़ को भेजूंगी गुड़ मोर्निंग हैलो
मैं तो ब्लॉग बनाना सीखूंगी - २
*
कटरीना से लूंगी फिटनेस का फ़ॉर्मूला
प्रियंका से जानूंगी फैशन के टिप्स
शाहिद से जानूंगी उसकी शादी की डेट
बॉयफ्रेंड को भेजूंगी होंठो के किस
मैं तो ब्लॉग बनाना सीखूंगी - २
*
पॉलिटिक्स में, मैं भी इंटेरेस्ट लूंगी
बॉलीवुड मूवी का मैं भी रिव्यू लिखूंगी
करप्शन पर मैं भी खूब बोलूंगी
फेसबुक पर मैं भी ग्रुप बनाउंगी
मैं तो ब्लॉग बनाना सीखूंगी - २

#रोमिल

Thursday, January 20, 2011

तुझसे मिलने की बेक़रारी हैं...

तुझसे मिलने की बेक़रारी हैं
दिन तो कट गया
अब रात की बारी हैं...
*
मोहब्बत का भी कैसा खेल हैं अजीब
जीत के भी हमने हर बाज़ी हारी हैं...
*
हमको नज़रे मार कर वो कहते हैं
यह ख़ता हमारी नहीं
नज़रों की बीमारी हैं..
*
कल उनको देखा था किसी अजनबी के साथ 
बाँहों में बाँहें डाले हुए
वो कहते हैं
शक़ करने की आदत तुम्हारी पुरानी हैं...

#रोमिल

Wednesday, January 19, 2011

कुछ फूल, पैरों से भी मसले जाते हैं...

औरत पर जुर्म करके मर्द कहलाते हैं
कुछ फूल, पैरों से भी मसले जाते हैं...
*
मोहब्बत करना तो आज कल का सिर्फ फैशन हैं
फिर पता नहीं लोग क्यों ताजमहल देखने जाते हैं...
*
दौलत की हवस ने इंसान को शैतान बना दिया हैं
फिर ना जाने इंसान क्यों भगवान को पूजने जाते हैं...
*
कल अखबार में पढ़ा था "रोमिल"
एक बाप ने अपनी बेटी को बे-आबरू किया
फिर ना जाने माँ-बाप क्यों भगवान कहलाते है...

#रोमिल

Tuesday, January 18, 2011

जाने कैसे बाबा हैं यह...

नींबू और मिर्च में भूत-प्रेत बाँध लेते हैं
जाने कैसे बाबा हैं यह
सोने को दुगना कर देते हैं...
*
झाड़ू मार-मार कर बीमारी भगा देते हैं
जाने कैसे बाबा हैं यह
अंगूठीयों से तकदीर सवार देते हैं...
*
रूपया के दम पर भगवान् को मना लेते हैं
जाने कैसे बाबा हैं यह
बुरे कर्मो को भी सुधार देते हैं...

#रोमिल

Monday, January 17, 2011

जाने कैसा फैसला हो गया

जाने कैसा फैसला हो गया
की दोनों के बीच फासला हो गया...
*
जिसकी सर की कसमे खाते थे दोनों
वही आज एक-दूसरे के लिए दुश्मन हो गया...
*
खुदा जाने कैसी हवा चली है यह
महबूब ही महबूब का कातिल हो गया...
*
रोती आँखों से सुनाया था उस लड़की ने अपना दर्द
अखबार के लिए खबर, 
दुनिया के लिए तमाशा हो गया...

#रोमिल

Sunday, January 16, 2011

रिश्तों में तो दरार आनी ही थी...

रिश्तों में तो दरार आनी ही थी
रूठकर मुझसे किस्मत जानी ही थी...

माँ न रही माँ
भाई न रहा भाई
हमसफ़र भी साथ छोड़कर मेरा, जानी ही थी
रिश्तों में तो दरार आनी ही थी
रूठकर मुझसे किस्मत जानी ही थी...

मेरे मिटने का उनको ग़म न था
आँखों में न आँसू थे
लबों पर एक हमदर्दी का शब्द न था 
ढूँढा लाख मिला न कोई एक दोस्त सच्चा
मुझे तो दोस्तों से पथ-पथ पर ठोखर खानी ही थी
रिश्तों में तो दरार आनी ही थी
रूठकर मुझसे किस्मत जानी ही थी...

रोमिल मत करो गिला किसी से तुम
कच्चे घड़े हैं यह रिश्ते
बरसात में बह जाने ही थे 
रिश्तों में तो दरार आनी ही थी
रूठकर मुझसे किस्मत जानी ही थी...

#रोमिल

Saturday, January 15, 2011

उफ़... वो बरसाती रात

उफ़... वो बरसाती रात
अकेले कमरे में दो बदन एक साथ

हवा थी जोरो पर
चारों ओर दूर तक सन्नाटा साथ

बिजली कड़कती हुई
पत्ते फडफडाते हुए
खुलती-बंद होती खिड़की का साथ

अँधेरे का फैलना
बादलों का छा जाना 
बिजली का गुप हो जाना
जलती हुई मोमबत्ती का साथ

उफ़... वो बरसाती रात
अकेले कमरे में दो बदन एक साथ...

#रोमिल

Thursday, January 13, 2011

लोग कहते थे की मैं गिर जाऊँगा...

लोग कहते थे की मैं गिर जाऊँगा
मगर मुझे तेरे ग़म ने संभाल रखा हैं...
आइना टूटा हैं मगर
सोने में जड़ा रखा हैं...
*
फिर कही मुलाक़ात होगी तेरी-मेरी
इसी हसरत को दिल में जगा रखा हैं...
*
ढूँढ़ पाए न कोई तेरी तस्वीर को
इसलिए मैंने इसे अपने दिल में छुपा रखा हैं...
*
तेरी आँखों में आँसू देखूँ तो भिड़ जाऊँ मैं खुदा से भी बच्चे की तरह  - २
तू खुश रहे हमेशा
बस यही खुदा से अरमान रखा हैं...

#रोमिल

Wednesday, January 12, 2011

लोहड़ी ओह लोहड़ी

लोहड़ी ओह लोहड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
बना लो रे जोड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
*
सोहनी सोहनी कुड़ी ने छेड़ी चुप्पी चुप्पी गल्लाँ
मैं नहीं मुंडे की रानी बनना   
सखी-सहेलीआं को नहीं छडना
रे चल गई मुंडिया के दिल पर कटारी
लोहड़ी ओह लोहड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
बना लो रे जोड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
*
मुंडे ने भी बाँह ऊंची करना
मुछो पर हाथ फेर कर कहना    
ज़माने से नहीं डरना
तेरा पीछा नहीं छडना  
अरे तुझे ही अपनी रानी बनाना
रे छड के बाह कुड़ी बागी  
लोहड़ी ओह लोहड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी
बना लो रे जोड़ी
रे आ गयी हैं लोहड़ी

#रोमिल

Tuesday, January 11, 2011

यह ख़्वाब बहुत मुश्किल हैं....मगर अच्छा हैं...

वो चाहे जितनी भी आँखों से ओझल रहे रोमिल बाबू
मगर उसका ख़्वाबों-ए-ख्याल अच्छा हैं...
*
चाहे कितने भी दुःख हमसे लिपटे रहे
उसका दामन रहे खुशियों से भरा उम्र भर रोमिल बाबू
अपने लिए बस यही अच्छा हैं...
*
और सितम मत करो अपने दिल पर रोमिल बाबू 
इसको रखो हसीनो से दूर
आपके लिए यही अच्छा हैं...
*
वो पूछते रहते हैं मरीजों का हाल
हमको एक नज़र देखते भी नहीं... २ 
एक हम मर रहे हैं जीते जी रोमिल बाबू
उनका यह कातिल-ए-अंदाज़ अच्छा हैं...
*
ख़्वाब हैं कि अपनी कब्र भी उनकी कब्र के साथ बने रोमिल बाबू 
यह ख़्वाब बहुत मुश्किल हैं
मगर अच्छा हैं...

#रोमिल

Monday, January 10, 2011

आपकी क़सम

कोई आपसा दीवाना मिले
ढूँढ रहे हैं हम 
आपकी क़सम
*
गली-गली ढूँढा उसे पर उससे मिल ना सके हम
आपकी क़सम
*
वो खूबसूरत आवाज़
वो शौक़-ए-मुस्कान
कही इसी आरज़ू में मर ना जाये हम...
आपकी क़सम 
*
जब तक ना पाएंगे उसे
यूँही सफ़र में रहेंगे हम 
आपकी क़सम

#रोमिल

Saturday, January 8, 2011

यह हिंद के शेर हैं...


कपकपाती हुई ठण्ड में भी डटे रहते हैं
बर्फ के मैदानों में भी मोर्चा संभाले रहते हैं 
यह हिंद के शेर हैं
हिंद की रक्षा करते हैं...
*
न यह धुंध, कोहरे से डरते नहीं  
बरसात, ओले में भी आगे बढते रहते हैं
चमकती हुए बिजली में भी चमकते रहते हैं 
यह हिंद के शेर हैं
हिंद की रक्षा करते हैं...
*
न बर्फीला मौसम इनको हारा पाता हैं
न गरजता बादल इनको डरा पाता हैं
दुश्मन भी देखकर इनका हौसला पीछे भाग जाता हैं
यह हिंद के शेर हैं
हिंद की रक्षा करते हैं...
*
हर भारतीय इन पर गर्व करता हैं
गर्व से यह कहता हैं
यह हिंद के शेर हैं
हिंद की रक्षा करते हैं...

#रोमिल

चलो लुफ्त सर्दियों के उठाते हैं

चलो लुफ्त सर्दियों के उठाते हैं
हल्के-हल्के गिरती हुई ओस में कहीं बाहर हम दोनों आइसक्रीम खाने जाते हैं...
हरी भीगी हुई घास पर नंगे पैर दूर तक चलते हैं...

और

किसी सड़क की दुकान पर खड़े होकर गरमा-गर्म गाजर के हलवे का मज़ा लेते हैं...
यही पास की दुकान में सुना हैं
केसरी दूध, कुल्हड़ में मिलता हैं
उसमें मखाने डालकर खाते हैं...
चलो लुफ्त सर्दिओं के उठाते हैं

#रोमिल

Friday, January 7, 2011

यह नुमाइश न बार-बार होगी...

मुझ पर हँसना हैं तो हंस लो
यह आज़माइश न बार-बार होगी
दिल बिक रहा हैं मेरा 
यह नुमाइश न बार-बार होगी...
*
कोई दौलत लाया हैं
कोई लाया हैं जेवरात
जो खरीद सके मेरा पाक-ए-दिल
वो दिलकश-ए-मुस्कान न जाने कहाँ होगी...
*
रही ज़िन्दगी भर यह कशमकश की उनसे मुलाक़ात हो जाये - २ 
आज बाज़ार में खुद बैठा हूँ
वो न जाने किस बाज़ार में होगी...
*
हज़ार तूफ़ान आये 
मगर मेरे सागर-ए-दिल से उसका नाम न मिटा सके - २
जीत लूं चाहे किसी भी हसीना को
मगर तुझे न पाकर
मेरी सिर्फ हार होगी...
मेरी सिर्फ हार होगी...

#रोमिल

Thursday, January 6, 2011

सर्द की रातों का अजब तजुर्बा मिला

सर्द की रातों का अजब तजुर्बा मिला
वो रही नज़रों के सामने
गर्मी का एहसास मिला...
*
फिर हवा खींचकर लाई उसे मेरे पास
काँपते हुए बदन को सहारा मिला...
*
आसमां ने भी गिरा दिए बारिश की बूँदें
छुपने को न कोई किनारा मिला...
*
बस एक बिजली गिरी और वो लिपट गई मुझसे
धुंध में भी मौसम सुहाना मिला...

#रोमिल

Wednesday, January 5, 2011

मैं बरसों से...

उसे ढूंढ रहा हूँ मैं बरसों से 
जिसका दीवाना हूँ, मैं बरसों से...
*
जिसे कहता रहा मैं खुदा उम्र भर   
उसे देखा नहीं हूँ, मैं बरसों से...
*
जिसकी खैरियत-ए-खबर सुनने को दिल फिक्रमंद रहता है 
उसके ख़त के इंतज़ार में हूँ, मैं बरसों से...
*
कोई तो समझता मेरे दर्द-ए-दिल को रोमिल
ऐसे इंसान से मिलने को बेताब हूँ, मैं बरसों से...

#रोमिल

Tuesday, January 4, 2011

हुस्न को बेनक़ाब होने दीजिये

हुस्न को बेनक़ाब होने दीजिये
ज़रा थोडा और हमको पास होने दीजिये...
*
ऐसे न लपेटो हमको अपने बदन से - २ 
महबूब मेरे.... 
ज़रा रात को तो और चाँदनी होने दीजिये...
*
यूं न झुकाओ नज़रे सनम 
ज़रा नज़रों से यह मदमस्त शराब पीने दीजिये...
*
ना कुछ तुम कहो
ना कुछ हम कहे 
यह जो हो रहा है आज होने दीजिये...

#रोमिल

बाप क़सम...

अस्पताल में जो उसका दीदार हो गया
बाप क़सम... तब से मैं दर्द-ए-दिल का बीमार हो गया...
*
हाथ पकड़कर जो उसने मेरी नब्स देखी
बाप क़सम... तब से जिस्म में मोहब्बत का बुखार हो गया...
*
जो उंगली से नीचे करके नज़रे देखी उसने अपनी नज़रों से
बाप क़सम... तब से उसका खुमार हो गया...
*
बड़ी तहज़ीब से जब वो बोली
२ दिन बाद फिर आना...
बाप क़सम... अपना तोह उम्र भर वही रहना का प्लान हो गया...

#रोमिल

Monday, January 3, 2011

एक इत्तेफाक और हो जाये

एक इत्तेफाक और हो जाये
काश राह चलते उनसे मुलाक़ात हो जाये...
*
आँखों से अश्खों की नदी बह जाये
ज़िन्दगी फिर तन्हाई के अंधेरों में कही खो जाये...
*
लिपटा उसका दामन मेरे हाथो में - २ 
कितना कहाँ था उससे दामन समेट ले
कहीं रास्ते में यूं ही बदनाम न हो जाये...
*
डरता हूँ कहीं लोग उसे मेरी दीवानी न कहने लगी - २
हल्की सी जो उसकी आँख लगे रोमिल 
उसके शहर से अपनी रवानगी हो जाये...

#रोमिल

Saturday, January 1, 2011

बड़ा याद आता हैं वो ज़माना

बचपन की शरारते, वो डोर बेल बजाकर भागना    
बड़ा याद आता हैं वो ज़माना
*
पार्क की दीवार पर बैठना, वो टाँगे हिलाना
बड़ा याद आता हैं वो ज़माना
*
नव वर्ष के कार्ड, वो कार्ड को रंगों वाले कलम से सजाना
बड़ा याद आता हैं वो ज़माना
*
गुब्बारे फुलाना, वो डोरी बाँधकर हवा में उड़ाना
बड़ा याद आता हैं वो ज़माना
*
०१ रूपया मांगना, वो पिग्गी बैंक में डालना
बड़ा याद आता हैं वो ज़माना

#रोमिल