Thursday, May 31, 2012

chalo khudse do-char pal churaya jaye

chalo khudse do-char pal churaya jaye
aaj raat bhar maa ki tasveer ke pass baith kar roya jaye

aur 

kuch to de khuda use mera dil todne ki saza
aaj use bhi raat bhar rulaya jaye, jagaya jaye

na meri hai, na meri hona chahti hai, 
khuda uski mohabbat ko kis naam se pukara jaye

maut se khaufzada, ishqzaade nahi hote
duniya ko yeh baat kis tarah samjhaya jaye

yeh zindagi ke kis mod par khade hai hum dono
na khul ke hansa jaye na khul ke roya jaye

#Romil

चलो खुद से दो चार पल चुराया जाए 
आज रात भर माँ की तस्वीर के पास बैठकर रोया जाए

और

कुछ तो दे खुदा उसे मेरे दिल तोड़ने की सजा 
आज उसे भी रात भर रुलाया जाए, जगाया जाए 

ना मेरी है और ना मेरी होना चाहती है 
खुदा उसकी मोहब्बत को किस नाम से पुकारा जाए 

मौत से ख़ौफ़ज़दा, इशकज़ादे नहीं होते 
दुनिया को यह बात किस तरह समझाया जाए 

यह जिंदगी के किस मोड़ पर खड़े हैं हम दोनों 
ना खुल के हंसा जाए, ना खुल के रोया जाए... 

#रोमिल

Wednesday, May 30, 2012

aansuon ke ghut-ghut peene se

aansuon ke ghut-ghut peene se
ghutan si ho rahi hai mujhe jeene se

lambi hai zindagi dost bhi saath nahi
kitna akelapan lagta hai coffee table par tanha bethkar coffee peene se

badal ghir aaye hai kahin chirag na bhuj jaye
dar lagta hai mujhe savan ke mahine se

yeh kaisi zanjeeren hai jo bandhati bhi nahi
door hoti ja rahi hai uski baahein mere seene se

aur

mujhe rota dekh aap bahut khush hoti hogi na
yeh baat kis tarah puchun main maa se.

#Romil 

आंसुओं की घुट-घुट पीने से 
घुटन सी हो रही है मुझे जीने से 

लंबी है जिंदगी दोस्त भी साथ नहीं 
कितना अकेलापन लगता है कॉफी टेबल पर तन्हा बैठकर कॉफी पीने से 

बादल घिर आये हैं कहीं चिराग न भुझ जाये 
डर लगता है मुझे सावन के महीने से 

यह कैसी जंजीर है जो बांधती भी नहीं 
दूर होती जा रही है उसकी बाहें मेरे सीने से 

और 

मुझे रोता देर आप बहुत खुश होती होगी ना 
यह बात किस तरह पूछूं मैं माँ से...

#रोमिल

Tuesday, May 29, 2012

उम्र भर बूँद - बूँद को तरसे आँखों से हमारे मुहब्बत के मोती बरसे

उम्र भर बूँद - बूँद को तरसे
आँखों से हमारे मुहब्बत के मोती बरसे
अच्छा हुआ हमें जो ठोकर लगी
कम से कम वो तो संभल गए गिरने से।

और 

ता-उम्र भी उसकी सेवा करूं तो कम हैं
माँ मिलती है नसीबों से
अपनी चमड़ी का जूता बनाकर उसको पहनाऊं 
इतना चाहू मैं खुद से।

और 

आज फिर कह रहा हूँ अपनी रूह से 
सुन ले उसको भूला दे 
कहीं दम न निकल जाये तेरी नादानी से।

#रोमिल

Monday, May 28, 2012

हम अंजान वो अंजान दिन - रात बातें किया करते है

हम अंजान वो अंजान
दिन - रात बातें किया करते है
इश्क तो एक - दूसरे से करते हैं
फिर भी जुबान-ए-इज़हार से डरते हैं।

और 

क्या पता माँ को यह खबर भी है कि नहीं 
हम खवाबों-ख्यालों में उनको ही पुकारा करते हैं
क्या पता कब पाप कटे 
क्या पता कब वो दिन आये
हम माँ से मिलने के एक-एक दिन गिना करते हैं।

और 

चंडीगढ़ में कहाँ रहती हो पता तो बता दो
सुनो !!!
चंडीगढ़ में कहाँ रहती हो पता तो बता दो 
हम खुद तुमसे मिलने के लिए तड़पा करते हैं।

और 

ए खुदा जी चाहता है उनको धर दूं दो-चार लाफ़ा जोर से 
जब वो सिर्फ दोस्त समझकर हमसे गुफ्तगू करते हैं
उम्र और उनका रिश्ते की यह कैसी ज़जीर हैं
जिसमे बंधा देखकर हम उनको न जीते है न मरा करते हैं।  
 
#रोमिल

Sunday, May 27, 2012

वो चाहते है कि कोई उसने अहल-ए-वफ़ा न करें

वो चाहते है कि कोई उसने अहल-ए-वफ़ा ना करें
खुदा सामने भी हो और इबादत ना करें 
बस इतनी सी राहत मुझे मिली है उससे
मुहब्बत तो करें मगर इज़हार की जुर्रत ना करे।

और

लब कह रहे है उठ और चूम ले माँ के पैरों को
शायद तेरे गुनाह-ए-अज़ीम इस बार माँ माफ़ करें
दिल चाहता है फिर माँ मेरे साथ दिन-रात हो
कुदरत शायद कोई करिश्मा करें।

और

वो दे रहा है मुझे कुछ इस तरह फरेब
साथ मेरे है और बातें किसी गैर की करें
शाम-ए-विसाल भी और यह तगाफुल, यह बेरुखी
खुदा किसी को इस तरह मुहब्बत में तबाह ना करें।

#रोमिल 



Friday, May 25, 2012

दिखा नहीं सूरज मगर चारों तरफ उजेला था

दिखा नहीं सूरज मगर चारों तरफ उजेला था
मुहब्बत-ए-ख़्वाब का मैंने कैसा आसमान ओढ़ा था
मैं लौट आया हूँ अंधेरों के सहारे  
वो साथ नहीं थी मेरे जब घनघोर अँधेरा था
और अब उससे करता हूँ सिर्फ अश्लीलता भरी बातें
मेरी मुहब्बत को जिसने दौलत के तराजू में तौला था।

और

वही पीपल का पेड़ वही चबूतरा 
मगर दिखा नहीं माँ का डाला हुआ झूला था
करीब खेल रहा था माँ-बेटे का जोड़ा - 2
मैं पार्क के किनारे जब उदास बैठा था।

और 

उसके इतने करीब से गुज़रा मगर खबर नहीं हुई
मेरे सिवा उसकी ज़िन्दगी में कोई दूसरा भी था।

#रोमिल

Thursday, May 24, 2012

मेरी बातों के भँवर में फँसकर तो सब खीचे चले आते हैं

मेरी बातों के भँवर में फँसकर तो सब खीचे चले आते हैं
कहाँ है वो लोग जो रूह की तड़प में मरे चले आते है
और मेरे आसपास रहता है हमेशा राजकुमारियों का जमघट
फिर भी ना जाने क्यों यह कदम उस बंजारन के दर पर खीचे चले जाते हैं।

और

मेरी माँ ने उस उम्र में मेरा साथ छोड़ा है
जिस उम्र में बच्चे माँ को खुशियाँ नसीब करवाते हैं
ना जाने यह जीस्त कब मिट्टी में मिलेगी
माँ के पास जाने के लिए यह मन के पंछी फड़फड़ाते हैं।      

और

मेरे इज़हार-ए-मुहब्बत पर इतना यकीन ना करो
यह वो दीये है जो नदी में छोड़े तो जाते है मगर जल्दी ही डूब जाते है।

#रोमिल

Wednesday, May 23, 2012

चलो ख़्वाबों में ही हमको अपना बना लो

चलो मेरे आंसू पर मिट्टी डालो 
थोडा तुम भी मुस्कुरा लो
माना कभी नहीं हम होंगे रूबरू
चलो ख़्वाबों में ही हमको अपना बना लो।

और 

अकेलेपन से खौफ आता है मुझको
माँ, आओ कुछ पल मेरे साथ बीता लो
बरसों से जागी हुई लगती है आँखें
माँ, आओ मुझे अपनी गोद में सुला लो।

और

चलो माना की तुमको मुझसे मुहब्बत है
यह भी तुम्हारा झूठ, सच माना
चलो माना की तुमको मुझसे मुहब्बत है
एक बार यह बात दुनिया-ए-जहाँ से नज़रे मिलाकर कह लो।

#रोमिल

Tuesday, May 22, 2012

हम उनके इश्कजादे, वो इश्कजादे है मेरे

मर के भी एक - दूसरे को रुसवा नहीं होने देंगे     
हम उनके इश्कजादे, वो इश्कजादे है मेरे
परेशां ही परेशां घूम रहे है हम दोनों
हम उनके दीवाने, वो दीवाने है मेरे।

और 

यूं तो साए की तरह माँ साथ रहती है मेरे
फिर भी महसूस होता है वो दूर है मेरे
मेरा दिल-ए-सुकून-चैन न समझ पाया तू खुदा
दौलत-शौहरत-नाम नहीं माँ है दिल-ए-सुकून-चैन में मेरे।

और

वो मेरा नाम लेकर मुझसे इज़हार-ए-मोहब्बत करें
इतने भी बड़े दीवाने नहीं है वो मेरे।

#रोमिल

दोस्त वो होता है....

दोस्त...

दोस्त वो होता है.... जिससे हम वो बातें शेयर कर लेते है, जो किसी से नहीं कर पाते।

(कुछ बातें ऐसी होती है जो या तो दिल में दफ़न हो जाती है या फिर दोस्त के दिल में उतर जाती है)

#रोमिल

Monday, May 21, 2012

इश्क़ में जान जो लूटा दे वो इश्क़जादे है हम

लखनऊ की गलियारों में फिरने वाले शहज़ादे हैं हम
इश्क़ में जान जो लूटा दे वो इश्क़जादे है हम
नए सफ़र पर रवाना हो चले है
नया नाम, नई शख्सियत हैं हम।

और

खुदा तुझसे दौलत- शौहरत की आरज़ू नहीं है मेरी
बस माँ की दीद के प्यासे है हम।

और 

हिसार-ए-शौक इतना भी अच्छा नहीं है उसका
कोई बता दे उसको
हिसार-ए-शौक इतना भी अच्छा नहीं है उसका 
मनचले नहीं मुहब्बत की कद्र वाले है हम।

#रोमिल

Sunday, May 20, 2012

मुझसे कतरा के निकल जाते हैं

मुझसे कतरा के निकल जाते हैं 
खुदा तेरे फ़रिश्ते गरीबों का घर नहीं जानते हैं

पास आकर मेरा दुःख बंटाने वाले
अभी मेरे ज़ख्मो पर मरहम लगाना नहीं जानते हैं

और 

उसको लिखकर कहा निकलती है दिल की भड़ास
जिनको आता है तमाचा जड़ने का हुनर वो कागज़ी-शतरंज नहीं जानते हैं

और

टूटी-फूटी मिट्टी की चार-दीवारी में महकती है माँ की खुशबू
दौलत के रंग से दीवार रंगने वालें नहीं जानते हैं।

#रोमिल

Saturday, May 19, 2012

क्या रिश्ता अब किसी से मेरा

क्या रिश्ता अब किसी से मेरा
वास्ता था तो माँ बस तुझी से मेरा

चहरे पर लगाकर ख़ुशी का नकाब फिरता हूँ 
किसको सुनाऊँ हाल-ए-दिल मेरा

ज़िन्दगी ने इतना सताया है 
मौत से भी टूट चूका है उम्मीद-ए-रिश्ता मेरा

किस पर करे ऐतबार हम खुदा
हर अपना ही निकला है गद्दार मेरा 

और 

दुनिया से बस इतना ही कहना हैं 
मरने से पहले
दुनिया से बस इतना ही कहना हैं
सनम-ए-खुदा है कातिल मेरा

#रोमिल

दोस्त वो होता है...

दोस्त...

दोस्त वो होता है... जो कडकी में आपके काम आता हैं।

(आज कल नौकरी नहीं है 100/- रूपया देना यार, नौकरी मिलते ही दे दूँगा) 

Friday, May 18, 2012

एक अजब सी परेशानी, एक अजब सी बेक़रारी हैं,

एक अजब सी परेशानी,
एक अजब सी बेक़रारी हैं,
रात भर बैठा सोचता रहता हूँ
ना जाने कैसी बीमारी हैं।

माँ के बिना ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती
फिर भी जिए जा रहा हूँ
ना जाने कैसी लाचारी हैं।

सोचता हूँ तोड़ दूं इस आशियाने को 
जिसमे माँ के साथ दिन-रात गुजारी हैं
यह सिर्फ आशियाना नहीं यादों का महल है 
यह गम-ए-दिल जहाँ से भारी हैं।

और

हमको ही पाने की चाहत हैं
हमसे ही मुहब्बत हैं  
फिर ना जाने यह क्यों परदे-दारी हैं।
खुदा-जाने...

#रोमिल 

Thursday, May 17, 2012

दोस्त वो होता है...

दोस्त...

दोस्त वो होता है... जो कभी आपसे आपका बचपन नहीं छीनने देता।
(60 की उम्र में भी 10 की उम्र वाली शरारते)

कभी मिले खुदा तुझे खुद से फुर्सत तो सुन मेरा भी अहले-ए-फ़साना

कभी मिले खुदा तुझे खुद से फुर्सत तो सुन मेरा भी अहले-ए-फ़साना
एक बच्चे की तड़प, आँखों से आसुओं का आना

यही ज़िन्दगी मुसीबत है फ़िक्र-ए-आशियाना में
कभी यही ज़िन्दगी मुसर्रत थी, इसी आशियाना में था माँ का ठिकाना

मेरे ख़्वाबों में फैली है गर्दिश-ए-जहाँ की
कभी मेरे ख़्वाबों से टपकता था इशरत-ए-शबाना

और

एकाएक एक दिन सनम मेरे घर आकर कहती है
"रोमिल, इस आशियाना से अब मुझको नहीं है जाना"

#रोमिल

Wednesday, May 16, 2012

दोस्त वो होता है...

दोस्त...

दोस्त वो होता है... जैसे छुट्टी वाली सुबह... आधी खिड़की से आती हुई सुबह की पहली किरण... नीम के पेड़ पर कोयल का मीठा बोलना...

दोस्त वो होता है... जो तीन चाय की चार कटिंग चाय करवा कर पिलवाता है...
"तीन की चार करना"    

ख़ामोशी कुछ कान में कह जाती है

ख़ामोशी कुछ कान में कह जाती है
बहती हवा चेहरे पर मेरे, अंगड़ाई लेकर निकल जाती हैं
सूरज आँखों को मेरे खोलता है
माँ का चेहरा दीवार में लटकी तस्वीर में से खिलखिला उठता हैं
सुबह फिर सुहानी सी लगने लगती है
दिन भी सुकून-ओ-चैन से कटता है 
रात फिर आती है
अकेले तन्हाई में मुझे सताती है
सिर से चादर ओढकर, आँख बंद कर सोने की कोशिश करता हूँ 
न जाने कब उस अँधेरी चादर में सुबह आ जाती है
ख़ामोशी कुछ कान में कह जाती हैं। 

और 

लगता है जन्मों से दुकान-ए-दीद हैं बंद
सनम का चेहरा जो नकाब ने ऐसा ढक रखा हैं।

#रोमिल  

Tuesday, May 15, 2012

दोस्त वो होता हैं...

दोस्त 

दोस्त वो होता हैं... जो सुबह तीन बजे आपको एडल्ट जोक एस.ऍम.एस. करता हैं।

कमीना दोस्त...

दोस्त वो होता है...

दोस्त...

दोस्त वो होता है जो क़यामत का खौफ नहीं बताता बल्कि कहता है जहाँ इतनी लड़कियों से मिल लिए वहां क़यामत से भी मिल लेंगे... आने दो !

#रोमिल

एक दिया ही तो देता था मेरे चमन में रोशनी-ए-जान

एक दिया ही तो देता था मेरे चमन में रोशनी-ए-जान 
खुदा ने वो भी बुझा दिया 

एक ही तो था मेरा अपना, मेरा हमसाया
खुदा ने वो सिलसिला ही मिटा दिया

महफ़िल-ए-रंग-ओ-नूर की फिर मुझे याद आ गई
खुदा ने हर महफ़िल को मातम बना दिया

इससे बड़ी क़यामत क्या होगी मेरे लिए
खुदा ने सिर से माँ का साया ही उठा दिया 

और

सोचता हूँ जिस्म से दिल को निकालकर कीमा बना दूं
कैसे इसने उस बेवफा को मेरा खुदा बना दिया।

#रोमिल

Monday, May 14, 2012

दोस्त वो होता है

दोस्त...

दोस्त वो होता है जो आपकी प्रेस की हुए शर्ट आपसे पूछे बिना पहनकर चला जाता है।

दोस्त वो होता है

दोस्त...

दोस्त वो होता है जो क्लास रूम में अपना कन्धा आपको सोने के लिए देता है।

दोस्त वो होता है

दोस्त...

दोस्त वो होता है जो हॉस्पिटल में आपका हालचाल नहीं बल्कि
नर्स कैसी है पूछता है।

#रोमिल

जो खुदा न कर सका वो काम माँ की यादों ने किया

जो खुदा न कर सका वो काम माँ की यादों ने किया
रोते हुए एक बच्चे को हँसा दिया

हमारा नाम लेने लगा खुदा भी
फरिश्तों ने आकर हमें सलाम किया

माँ की तस्वीर से करता रहा बातें
मदर डे पर उसने यही काम सुबह और शाम किया

श्रीराम या श्रवण कुमार, ज़माना उनको हमेशा याद रखेगा
जिसने माँ-पिता पर अपना जीवन वार दिया

और

ए नादान दिल उस शख्स से मैं कैसे मुहब्बत कर पाऊंगा 
जिसने मुसीबत में हमसफ़र बनकर साथ ना दिया।

#रोमिल

Sunday, May 13, 2012

माँ के बिना ज़िन्दगी है, मगर ज़िन्दगी नहीं

जलता हुआ दिया हूँ जिसमें रोशनी नहीं
माँ के बिना ज़िन्दगी है, मगर ज़िन्दगी नहीं

चार महीने बीत चुके है माँ की चिता की आग को बुझे हुए
लेकिन दिल में जो जल रही है आग अभी वो बुझी नहीं

यह चाँद, यह बादल, यह फूल, यह हवा, यह फिजा
सब जगह माँ का चेहरा
 कौन कहता है खुदा किसी रोते हुए बच्चे की सुनता नहीं     
और 

यूंह तो सब कुछ हैं मेरे पास कोई कमी नहीं
फिर भी रातों को नींद आती क्यों नहीं।

#रोमिल

Saturday, May 12, 2012

चार महीने सिर्फ बीते है मेरी माँ के जनाज़े को

चार महीने सिर्फ बीते है मेरी माँ के जनाज़े को
शर्म भी नहीं आती मुझे मशवरा देने वालों को.

माँ की सीख ने बांध रखी है मेरी जुबान को
वरना खुले-ए-बाज़ार बेइज़्ज़हत करता मुझे समझाने वालों को

(माँ के वक़्त... उस वक़्त...)
तब कोई नहीं आया जब मैं पुकारता रहा साथ देने वालों को 
जी चाहता है कफ़न तोहफा करूँ निकाह की तजवीज़ देने वालों को

और

(मोबाइल पर चर्चा कहा हो पाती हैं...)
जवाब-ए-नजराना तो हम भी उसे खूब देते रोमिल
काश वो दो पल तो देते आमने-सामने बैठकर गुफ्तुगू के तरीके से गुफ्तुगू को।

#रोमिल

kuch aise hi...

(1)
bada accha lagta hai romil
unka sawal karna,
sab kuch jaan ke anjaan banna.

meri dil ki dhadkan se wakif hai woh shaks
fir bhi puchata hai naam apna !

बड़ा अच्छा लगता है रोमिल 
उनका सवाल करना 
सब कुछ जान के अंजान बनना... 

मेरे दिल की धड़कन से वाकिफ है वो शख्स 
फिर भी पूछता है नाम अपना!

(2)
Raat bhar jagate rahenge hum umar bhar is ehsaas ke saath romil
ki subah unki baahon mein hogi !

रात भर जागते रहेंगे हम उम्र भर इस एहसास के साथ रोमिल 
की सुबह उनकी बाहों में होगी !

(3)
haq hi nahi hai apna ki unse kuch baatein keh sake,
sach to yeh bhi hai romil,
yeh baat samaj nahi aati ki unse door kaise reh sake !

हक ही नहीं है अपना की उनसे कुछ बातें कह सके 
सच तो यह भी है रोमिल 
यह बात समझ नहीं आती की उनसे दूर कैसे रह सके !

Friday, May 11, 2012

एक बच्चे को माँ से जुदा किया है

खुदा इस तरह तूने मुझ पर सितम किया है
एक बच्चे को माँ से जुदा किया है

पिता का साथ तो पहले ही तू छीन चुका था
माँ को छीनकर तूने नया ज़ख्म दिया है

मैं सोचता था तू दूसरों जैसा नहीं होगा
तूने भी वही काम सर-ए-आम किया हैं 

और

मुश्किल था मेरे लिए तेरा नाम मिटाना
मेरी जान यह भी काम तूने असां किया है।

#रोमिल

Thursday, May 10, 2012

खुदा ज़रा देख मेरे घर को

खुदा ज़रा देख मेरे घर को
माँ को दो घडी ही सही भेज दे मुझे सुलाने को

इतना भी ताक़त का नशा अच्छा नहीं होता
खुदा सताए किसी बच्चे को

कुछ तो हो जाते कम मेरे आंसू
बाहों में भरकर माँ जो झुला देती मुझको

और 

जितने मुँह उतनी ही बातें हैं चारों तरफ
दीवाने है दुनिया वाले उसका नाम लेकर चिढ़ाते है मुझको।

#रोमिल    

Wednesday, May 9, 2012

माँ की सीख है इसे भूल ना जाओ

माँ की सीख है इसे भूल न जाओ
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाओ

यूं फ़िक्र में दिन-रात गलते न जाओ
उठो मुसीबत को सुलझाओ

ज़ुल्म की होती है रात छोटी
डरो नहीं, दिन निकलेगा 
इन्साफ की सुबह को गले लगाओ

गलत होता देख मूह फेर लेना अच्छा नहीं होता 
खुद में हिम्मत लाओ
कुछ बदल के दिखाओ.

और

जब तक वो ना बन सके एक अच्छी इंसान
उसे हर्गिज़ ना अपनाओ
उसे हर्गिज़ ना अपना बनाओ।

#रोमिल

Tuesday, May 8, 2012

खुशियाँ हमारे सर-ए-ताज होंगी जब माँ हमारे साथ होगी.

खुशियाँ हमारे सर-ए-ताज होंगी
जब माँ हमारे साथ होगी.

लब खामोश रहेंगे ना हिल सकेंगे
नज़रे आसमान-ए-हद को पार कर खुदा के दर पर होंगी.

दूरियों के सब फासले हम मिटा देंगे
जन्नतें ज़मीन पर होंगी.

चाँद-तारे ज़मीन पर गुल-ओ-गुलज़ार हो रहे होंगे
एक बच्चे की तमन्ना पूरी हो रही होगी.

और

मेरे मरते हुए दिल को कुछ तो जरुर मिली होगी मदद
जब उसने मुझे कडवाहट भरी बातें कहीं होंगी।

#रोमिल

Monday, May 7, 2012

कलम उठाओ और माँ के नाम ख़त लिखो

कलम उठाओ और माँ के नाम ख़त लिखो
आँखों का नर्म होना लिखो, होंठों की मुस्कान लिखों

किस कदर बिताये है दिन-रात लिखो
सुबह का अकेलापन लिखो रात का सूनापन लिखो

मिलने की खवाइश लिखों
साथ रहने के ख़यालात लिखों

और

जी कहता है उसकी ग़लतफ़हमियाँ दूर करो  
मोहब्बत की शुरुआत लिखो

यह भी सच है
जी कहता है उसकी कुछ ना सुनो उसको कुछ ना लिखों।

#रोमिल

Sunday, May 6, 2012

ज्यादा देर तक आसमान को देखूंगा तो गिर जाऊँगा

माँ से बिछड़ गया तो कहाँ जाऊँगा 
ज्यादा देर तक आसमान को देखूंगा तो गिर जाऊँगा 

मैं इसी उम्मीद पर जिंदा हूँ
एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाऊँगा 

चाहे पहुँच जाऊं मैं आसमान की बुलंदियों तक 
जिस दिन माँ को भूलूंगा मर जाऊँगा 

और

उसके परिवार वाले भी मेरे अपने है
उनके मरने की दुआ पढूंगा तो काँप जाऊँगा 

मगर यह भी सच है
उनका सगा बना तो मैं अपनी माँ का गुनाहगार हो जाऊँगा।

#रोमिल

Saturday, May 5, 2012

कच्चे घड़े भी नदी को पार कर जाते है

कच्चे घड़े भी नदी को पार कर जाते है 
माँ की दुआ साथ हो तो बच्चे सफलता पा ही जाते है 
चिराग डरते नहीं आंधियों से
माँ साथ हो तो पिल्ले भी शेर हो जाते है

और 

मेरी रूह की हकीक़त मेरे आँसुओं से पूछो
अक्सर फर्श पर गिरते ही मोती हो जाते हैं।

#रोमिल

Friday, May 4, 2012

माँ के साथ ज़िन्दगी चली गई

चेहरे से रौनक, आँखों से चमक चली गई 
माँ के साथ ज़िन्दगी चली गई

आइना देखकर मुझे कहता है
तेरे होंठों से हंसी चली गई

दुनिया की भीड़ में तन्हा खड़ा हूँ
मेरे शब्दों से तहज़ीब चली गई  
 
और 

अजीब था वो शख्स
उसके जाते ही मुझमें से मुहब्बत की सच्चाई चली गई।

#रोमिल

Thursday, May 3, 2012

माँ की यादों का घना कोहरा छाया रहता है

माँ की यादों का घना कोहरा छाया रहता है
आँखों से मौसम भी जमकर बरसता है
दिल में बेताबियाँ लेकर दबे पाँव, मुँह फेरकर गुरूद्वारे से लौट पड़ता हूँ    
जब चाँद सा माँ का चेहरा नहीं दिखता हैं। 

और 

दोनों हाथ उठाकर जब उसके लिए बद्दुआ मांगता हूँ 
    सांसें टूटती है, अपनी ज़िन्दगी तबाह करता हूँ। 

पर यह भी सच है
मैं जितना उससे मुहब्बत करता हूँ 
उतना ही उससे नफरत करता हूँ। 

#रोमिल

Wednesday, May 2, 2012

न जाने क्यों माँ मेरे पास नहीं आती

न जाने क्यों माँ मेरे पास नहीं आती
मैं चाहे जितना भी उसे पुकार लूं 
मेरी आवाज़ उस तक नहीं जाती.
खुदा भी न जाने क्यों सुनकर अनसुना कर देता है
शायद किसी रोते-बिलकते बच्चे की आवाज़ उसे पसंद नहीं आती।

और

मैं उससे बेपनाह मोहब्बत करता हूँ
यह बात उसको समझ क्यों नहीं आती। 

यह भी सच है रोमिल
मेरे मन से उसके लिए कडवाहट नहीं जाती।

#रोमिल 

Tuesday, May 1, 2012

माँ की याद आई, दिन सुहाने हो गए

माँ की याद आई, दिन सुहाने हो गए
आँखों से गिरे आंसू, मोती हो गए
आइना में दिखते चेहरे बोल उठे
रोते हुए चेहरे पुराने हो गए.

और

वो बताकर अपना दर्द महफ़िल में 
मेरी तौहीन कुछ इस कदर कर गया
अब उसके ज़िन्दगी-ए-ग़म भी औरों के हो गए. 

#रोमिल

kuch mere liye...

चलते - चलते जूता भी चल बसा.

रहने को घर नहीं सारा जहाँ हमारा.

जो खालसा की इज्ज़त नहीं करता
रोमिल उसकी इज्ज़त नहीं करता.

#रोमिल

Kuch Aise Hi...

(1)
Dar-o-deewar par parchai chhod jaunga
yaad karega yeh shehar woh kahani chhod jaunga
tum mujhse chahe kitna bhi chupa lo yeh chehara
main tere chehare par apne pyar ki nishani chhod jaunga.

दर-ओ-दीवार पर परछाई छोड़ जाऊंगा 
याद करेगा यह शहर को कहानी छोड़ जाऊंगा 
तुम मुझसे चाहे कितना भी छुपा लो यह चेहरा 
मैं तेरे चेहरे पर अपने प्यार की निशानी छोड़ जाऊंगा.

(2)
Tractor ke yug mein bhi log kheton mein hal chalate hai
mobile ke daur mein bhi log chittiyon se ishq farmate hai
computer ke daur mein bhi log kitabon se padate-padhate hai
hum garib log hai saheb rishta jodate hai to umar bhar nibhate hai.

ट्रैक्टर के युग में भी लोग खेतों में हल चलाते हैं 
मोबाइल के दौर में भी लोग चिट्ठियों से इश्क़ फ़रमाते हैं 
कंप्यूटर के दौर में ही लोग किताबों से पढ़ते-पढ़ाते हैं 
हम गरीब लोग हैं साहेब रिश्ता जोड़ते हैं तो उम्रभर निभाते हैं...

(3)
mitti ke saman par warranty kaun dega
tum jaisa dost humko fir milega is baat ki guarantee kaun dega.

मिट्टी के समान पर गारंटी कौन देगा 
तुम जैसे दोस्त हमको फिर मिलेगा इस बात की गारंटी कौन देगा...

(4)
Patjhad ke mausam mein pauda kaun lagayega
sab agar dushman ban gaye, fir kandha kaun uthayega
mujhe yunh na tanhai ki maut maar mere humdum
tu chala gaya to fir mujhe jeene ka saleeqa kaun seekhayega.

पतझड़ के मौसम में पौधा कौन लगाएगा 
सब अगर दुश्मन बन गए, फिर कंधा कौन उठाएगा 
मुझे यूं ना तन्हाई की मौत मार मेरे हमदम 
तू चला गया तो फिर मुझे जीने का सलीक़ा कौन सिखाएगा...

(5)
insaani fitrat se kahan waqif ho paoge
ek chehare pe dus chehare lagaye rehte hai
jinko hum samajhate hai apna
woh hi hum par sau ilzaam lagaye rehte hai.

इंसानी फ़ितरत से कहां वाकिफ़ हो पाओगे 
एक चेहरे पे दस चेहरे लगाए रहते हैं 
जिनको हम समझते हैं अपना 
वो ही हम पर सौ इल्ज़ाम लगाए रहते हैं...

(6)
Jab soge tab yeh khawab aayega
Lucknow mein bichada koi dost yaad aayega
subah utoge jab tum, milengi palkein bheegi
aur honthon par bas hamara naam aayega.

जब सोगे तब यह ख़्वाब आएगा
लखनऊ में बिछड़ा कोई दोस्त याद आएगा 
सुबह उठोगे जब तुम, मिलेंगी पलकें भीगी 
और होंठों पर बस हमारा नाम आएगा...

(7)
Kisi ko humne nahi chhoda
Kisi ne humko nahi chhoda
ab kya kaha-suni kare hum zindagi se
kambakht zindagi ne hamara saath na chhoda.

किसी को हमने नहीं छोड़ा
किसी ने हमको नहीं छोड़ा 
अब क्या कहासुनी करें हम ज़िन्दगी से 
कम्बख़्त ज़िन्दगी ने हमारा साथ ना छोड़ा...

(8)
Sukr hai unko hamari yaad to aai
hamari dua kuch sabab to lai
woh wahan kar rahe hai humko yaad
aur dekho humko hichaki yahaan aai.

शुक्र है उनको हमारी याद तो आई
हमारी दुआ कुछ सबाब तो लाई 
वो वहां कर रहे हैं हमको याद 
और देखो हमको हिचकी यहाँ आई...

#Romil
#रोमिल